11 वें वल्र्ड कांग्रेस प्रिवेन्टिव कार्डियोलोजी कान्फ्रेन्स

11 वें वल्र्ड कांग्रेस प्रिवेन्टिव कार्डियोलोजी कान्फ्रेन्स

दिल हमेशा जवां रखने के लिए प्रकृति के नियमों का अनदेखा ना करें-कृष्णा राज
ह्दयरोग विशेषज्ञों के सम्मेलन का शुभारम्भ, दिल की बीमारी के विभिन्न 
आबू रोड, 23 सितम्बर, निसं। पूरे विश्व में ह्दयरोग एक महामारी का रूप ले रहा है। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में दुनिया के कई देशों से आये चिकित्सकों का मंथन इस पर अंकुश लगाने में कामयाब होंगे। परन्तु यदि दिल को हमेशा जवां रखना है तो उसके लिए प्रकृति के नियमों का पालन करना चाहिए। उक्त उदगार भारत सरकार की महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री कृष्णा राज ने व्यक्त की। वे ब्रह्माकुमारीज संस्था के शांतिवन में आयोजित

11 वें वल्र्ड कांग्रेस प्रिवेन्टिव कार्डियोलोजी कान्फ्रेन्स एवं इमेजिंग में देश विदेश से आये ह्दयरोग विशेषज्ञों के सम्मेलन के उदघाटन अवसर पर बोल रही थी।

उन्होंने चिकित्सकों का आह्वान करते हुए कहा कि देश में तेजी से बढ़ रहे ह्दयरोग की रोकथाम के लिए लोगों में जागरूकता पैदा करें। पिछले कुछ वर्षों में अध्यात्म और सकारात्मक जीवन शैली से बीमारियों पर नियंत्रण हो रहा है। ऐसे में हमें जरूरत है कि प्रकृति के नियमों पर चलते हुए ह्दयरोग से बचा जा सकता है। ब्रह्माकुमारीज संस्था इस क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रही है।
ब्रह्माकुमारीज संस्था की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी जानकी ने कहा कि जीवन में मूल्य अध्यात्म के जरिये प्रवेश करता है। प्राचीन समय में हमारे देश में संत और महात्माओं ने यह सिद्ध कर दिया है कि जीवन रक्षक सामग्री योग है। जिससे जीवन की अनेक व्याधियों से मुक्ति दिलाने में सहायक है। राजयोग इन पद्धतियों में से एक है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एसएस अग्रवाल ने कहा कि निश्ति तौर पर विज्ञान ने तरक्की कर हर क्षेत्र में अपना दावा मजबूत किया है। परन्तु कुछ बीमारियां ऐसी है कि उनसे निबटने में विज्ञान ने भी हाथ खड़े कर दिये है। ह्दयरोग का इलाज तो है परन्तु स्थायी इलाज नहीं है। स्थायी इलाज के लिए अपने जीवन पद्धति को बदलना होगा। यह भारत में तेजी से हो रहा है।
कार्डियोलाजी सोसायटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डा एच के चोपड़ा ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में तेजी से ह्दयरोग बड़ी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में अध्यात्म के उपर आकर सबकी सुई रूक गयी है। अध्यात्म और सकारात्मक जीवनशैली से निश्चित तौर पर लोगों की जिन्दगी में बदलाव आ रहा है। यह एक सुखद संकेत है। अमेरिका से आये सुप्रसिद्ध ह्दयरोग विशेषज्ञ जगत नरूला ने कहा कि भारत में ह्दयरोग तेजी से बढऩे का कारण मानसिक तनाव और खानपान का ध्यान ना देना है।
संस्था की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी ने कहा कि सकारात्मक जीवन शैली और अध्यात्म में इतनी शक्ति है कि शरीर तो क्या वह आत्मा की बीमारी भी ठीक कर देती है। इसलिए अध्यात्म से बढिय़ा कोई दवा नहीं। संस्था के महासचिव बीके निर्वेर, यूएसए के डा एच के रेड्डी, अजय कुमार लोढ़ा, आयोजक सचिव डा सतीष गुप्ता ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किये।
तीन दिन चलेगा मंथन: यह सम्मेलन 25 सितम्बर को समाप्त होगा। तीन दिनों के अन्दर ह्दय रोग होने के कारण, उसके निवारण के सभी पहलुओं पर चर्चा की जायेगी।
फोटो, 23एबीआरओपी, 1, 2, 3, 4, 5 सम्मेलन को सम्बोधित करती केन्द्रियमंत्री कृष्णा राज, सभा में उपस्थित चिकित्सक।

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