आत्मनिर्भर किसान एवं किसानों का सम्मान

Bilaspur uslapur-आत्मनिर्भर किसान एवं किसानों का सम्मान-01
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प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय ओम शांति सरोवर उसलापुर बिलासपुर के प्रांगण में आजादी के अमृत महोत्सव पर `राष्ट्रीय किसान दिवस` 23 दिसंबर के शुभ अवसर पर किसान भाइयों के सम्मान समारोह का कार्यक्रम रखा गया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि माननीय धीरेंद्र दुबे जी भारतीय कृषि संघ जिला अध्यक्ष, माननीय सोनू तिवारी जी (जिला महामंत्री भारतीय कृषि संघ), माननीय लक्ष्मी सिन्हा (जिला राजस्व प्रमुख), माननीय राजेंद्र घोसले जी, माननीय रामसेवक कुशवाहा भारतीय कृषि संघ जिला सह मंत्री बिलासपुर, माननीय मनोज आहूजा जी, एवं सेवा केंद्र संचालिका आदरणीय बीके छाया दीदी द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सेवा केंद्र संचालिका आदरणीय ब्रम्हाकुमारी छाया दीदी ने “आत्म निर्भर किसान” विषय पर कहा की किसान इस देश की शान है. भारत को सुपर पावर बनाने के लिए किसान अहम भूमिका निभाते हैं. वर्तमान समय किसानों के खोए हुए सम्मान को जगाने का है आत्म सम्मान एक ऐसा उपहार है जिसे प्राप्त करने से व्यक्ति और अच्छी तरह मेहनत करके खुशी और तेजी से सफलता के शिखर को प्राप्त कर सकता है।
सम्मान का अर्थ है स्वयं को अपने सच्चे स्वरूप में जानना, मानना और पहचानना. आत्मविश्वास से ही आत्म सम्मान जागृत होगा. आत्मविश्वास का उद्गम आत्म जागृति से होता है जिसके आधार पर आत्म सम्मान तथा अन्नदाता अपने सम्मान को जागृत कर सकता है. मनुष्य के मन में दुर्बलता तब आती है जब उसमें आत्मविश्वास नहीं होता आत्मसम्मान से परिपूर्ण मन अपने जीवन में सुख शांति एवं आत्मीय भावनाओं को सबल करता है, जीवन में सुनहरे पलों को लाता है।
यदि स्वयं मन से कमजोर होंगे तो दूसरों पर हमें निर्भर रहना पड़ेगा, दूसरों के ऊपर निर्भर रहेंगे तो धीरे-धीरे हमारा आत्मसम्मान कम होता जाएगा. हमें अपने आत्मसम्मान को बनाए रखते हुए सभी का सम्मान करना है. आत्मसम्मान कोई खरीदने का विषय नहीं है.
हमारी हर सकारात्मक सोच सफलता की ओर बढ़ाती है इसलिए खुद पर आत्मविश्वास होना आवश्यक है. हमें जीवन में कई परेशानियों का सामना करना होता है ऐसे में हमें हार नहीं माननी चाहिए खुद पर विश्वास रखना पहला कदम है, क्योंकि जब तक खुद पर भरोसा है हम हार नहीं मान सकते.
जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए कुछ अच्छा करने के साथ-साथ सकारात्मक विचारों की भी जरूरत होती है. ब्र कु छाया दीदी ने राजयोग का परिचय देते हुए कहा की राजयोग सकारात्मक विचारों का सच्चा स्त्रोत है जब किसान स्वयं के बारे में उत्तम एवं खेती के बारे में अच्छा सोचेंगे तभी उनके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी. राजयोग हमें योगी जीवन द्वारा निर्मल मन से सच्चे अर्थ में स्वाभिमानी बनना सिखाता है, यही इस कार्यक्रम का एकमात्र उद्देश्य है. तत्पश्चात ब्र कु छाया दीदी ने किसान भाइयों से अपने आत्मसम्मान को बनाए रखने के लिए संगठित रूप में प्रतिज्ञा करवाई तथा मेडिटेशन के द्वारा उन्हें सकारात्मक उर्जा का अनुभव कराते हुए राजयोग की अनुभूति कराई.
माननीय धीरेंद्र दुबे जी ने ब्रह्मा कुमारीज बहनों द्वारा किसानों के सम्मान हेतु आभार व्यक्त किया तथा जैविक खेती के बारे में विस्तार से बताया उन्होंने कहा कि हमारा देश अन्य पर आधारित है अगर हम देखें तो भारत सोने की तो भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था अन्य धन की समृद्धि थी बौद्धिक क्षमता अधिक थी कार्य क्षमता अधिक अधिक थी आधुनिकता की दौड़ में अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं यह चिंतनीय विषय है योग का प्रयोग हमें उत्पादन में भी करना चाहिए।
माननीय सोनू तिवारी जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि जैविक खेती से उत्पादन तो अधिक होता है लेकिन शुगर बीपी कैंसर जैसी बीमारी भी बढ़ती जाती है यह चिंतनीय विषय है
माननीय रामसेवक भाई जी ने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि जैविक खेती में जमीन की उर्वरा शक्ति में कमी तथा भागदौड़ मेहनत अधिक लगती है तथा उससे उत्पादित अनाजों से शारीरिक क्षमता घटती है जबकि योगिक खेती द्वारा पौष्टिक अनाजों का उत्पादन किया जाता है जिससे शारीरिक क्षमता में वृद्धि होती है
माननीय मनोज भाई जी ने कहा कि सेना के बाद यदि किसी का सम्मान होना चाहिए तो किसानों का सम्मान होना चाहिए क्योंकि किसान अन्नदाता है उन्होंने कहा कि सकारात्मक विचारों के प्रयोग जीवन में करने से खुशियां बढ़ने लगती है तथा योगिक खेती में करने से अच्छी फसलों का उत्पादन होता है
कार्यक्रम में सभी अतिथियों का सम्मान ईश्वरीय सौगात साल, नारियल देकर बीके छाया दीदी के द्वारा किया गया एवं सभी किसान भाई बहनों का सम्मान अतिथियों व ब्रकु छाया दीदी के द्वारा पट्टू व नारियल, प्रसाद देकर किया गया.
समर्पित ब्रह्मा कुमार विनोद भाई ने योगिक खेती के विषय में विस्तार से बताते हुए कहा कि यह एक ऐसी कृषि पद्धति है जिसमें मन को परमात्मा से जोड़कर राजयोग की शक्ति का प्रयोग न केवल मनुष्य आत्माओं पर बल्कि जीव-जंतुओं पेड़ पौधों पर करते हुए संपूर्ण प्रकृति को चैतन्य ऊर्जा के प्रकंपनो से चार्ज किया जाता है. इससे धरती की उर्वरा शक्ति पुनः स्थापित कर शुद्ध, सात्विक पौष्टिक अनाज, फल तथा सब्जियों का उत्पादन होता है।
कार्यक्रम का मंच संचालन अभिलाषा बहन ने किया, कविता बहन द्वारा स्वागत नृत्य गीत आंगन ये द्वारे….. द्वारा प्रस्तुत किया गया, ब्रम्हाकुमारी बहनों द्वारा अतिथियों का तिलक व गुलदस्ते से स्वागत किया गया, संस्था परिचय ब्रह्माकुमारी खुशी बहन ने दिया, ब्रह्मा कुमारी हेमा बहन ने किसानों के ऊपर सुंदर कविता ओ किसान तू है महान…… की प्रस्तुति दी, ब्रह्माकुमारी गरिमा बहन ने अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया.

Centre: BILASPUR USLAPUR

Type: Plantation

Venue: ब्रह्मा कुमारी ओम शांति सरोवर मुंगेली रोड उसलापुर बिलासपुर

Speaker: बीके छाया बहन (सेवा केंद्र संचालिका)

Cultural Details: कविता बहन के द्वारा स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया गया।

Follow-up: मार्च महीने में फॉलो किया जाएगा

Testimonials: माननीय धीरेंद्र दुबे जी ने ब्रह्मा कुमारीज बहनों द्वारा किसानों के सम्मान हेतु आभार व्यक्त किया तथा जैविक खेती के बारे में विस्तार से बताया उन्होंने कहा कि हमारा देश अन्य पर आधारित है अगर हम देखें तो भारत सोने की तो भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था अन्य धन की समृद्धि थी बौद्धिक क्षमता अधिक थी कार्य क्षमता अधिक अधिक थी आधुनिकता की दौड़ में अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं यह चिंतनीय विषय है योग का प्रयोग हमें उत्पादन में भी करना चाहिए।
माननीय सोनू तिवारी जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि जैविक खेती से उत्पादन तो अधिक होता है लेकिन शुगर बीपी कैंसर जैसी बीमारी भी बढ़ती जाती है यह चिंतनीय विषय है
माननीय रामसेवक भाई जी ने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि जैविक खेती में जमीन की उर्वरा शक्ति में कमी तथा भागदौड़ मेहनत अधिक लगती है तथा उससे उत्पादित अनाजों से शारीरिक क्षमता घटती है जबकि योगिक खेती द्वारा पौष्टिक अनाजों का उत्पादन किया जाता है जिससे शारीरिक क्षमता में वृद्धि होती है
माननीय मनोज भाई जी ने कहा कि सेना के बाद यदि किसी का सम्मान होना चाहिए तो किसानों का सम्मान होना चाहिए क्योंकि किसान अन्नदाता है उन्होंने कहा कि सकारात्मक विचारों के प्रयोग जीवन में करने से खुशियां बढ़ने लगती है तथा योगिक खेती में करने से अच्छी फसलों का उत्पादन होता है
कार्यक्रम में सभी अतिथियों का सम्मान ईश्वरीय सौगात साल, नारियल देकर बीके छाया दीदी के द्वारा किया गया एवं सभी किसान भाई बहनों का सम्मान अतिथियों व ब्रकु छाया दीदी के द्वारा पट्टू व नारियल, प्रसाद देकर किया गया.
समर्पित ब्रह्मा कुमार विनोद भाई ने योगिक खेती के विषय में विस्तार से बताते हुए कहा कि यह एक ऐसी कृषि पद्धति है जिसमें मन को परमात्मा से जोड़कर राजयोग की शक्ति का प्रयोग न केवल मनुष्य आत्माओं पर बल्कि जीव-जंतुओं पेड़ पौधों पर करते हुए संपूर्ण प्रकृति को चैतन्य ऊर्जा के प्रकंपनो से चार्ज किया जाता है. इससे धरती की उर्वरा शक्ति पुनः स्थापित कर शुद्ध, सात्विक पौष्टिक अनाज, फल तथा सब्जियों का उत्पादन होता है।

Beneficiaries: 75

Guests: माननीय धीरेंद्र दुबे जी ( भारतीय कृषि संघ जिला अध्यक्ष ) , माननीय राजेंद्र घोसले जी ( वरिष्ठ किसान ) , माननीय रामसेवक कुशवाहा जी ( भारतीय कृषि संघ जिला सह मंत्री ) , माननीय लक्ष्मी सिन्हा जी ( भारतीय कृषि संघ जिला राजस्व प्रमुख ) , माननीय सोनू तिवारी जी ( भारतीय कृषि संघ जिला महामंत्री )

Wings: RDW

Feedback: सभी अतिथियों एवं उपस्थित किसान भाई बहनों को यह प्रोग्राम बहुत अच्छा लगा और उन्होंने राजयोग मेडिटेशन सीखने की इच्छा जाहिर की।

Email: [email protected]

Mobile: 9009852538

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