
Avyakt BapDada
22-02-1990
बापदादा सभी बच्चों के उत्साह का उत्सव देख रहा था। सेवा करना अर्थात् उत्साह से उत्सव मनाना। जितनी बड़ी सेवा करते हो बेहद की, उतना ही बेहद का उत्सव मनाते हो। सेवा का अर्थ ही क्या है? सेवा क्यों करते हो? आत्माओं में बाप के परिचय द्वारा उत्साह बढ़ाने के लिए। जब सेवा के प्लैन बनाते तो यही उत्साह रहता है ना कि जल्दी-से-जल्दी वंचित आत्माओं को बाप से वर्सा दिलायें, आत्माओं को खुशी की झलक का अनुभव करायें। तो सेवा भी उत्सव है — इस विधि से सेवा करो। स्वयं भी उत्साह में रहो, सेवा भी उत्साह से करो और आत्माओं में भी उत्साह लाओ तो क्या होगा? जो भी सेवा करेंगे उस द्वारा अन्य आत्माओं का भी उत्साह बढ़ता रहेगा।