21 दिसंबर 2025 को संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा (UNGA) द्वारा घोषित विश्व ध्यान दिवस को “विश्व एकता एवं विश्वास हेतु ध्यान” थीम के अंतर्गत देश के विभिन्न शहरों में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर राजयोग ध्यान, आध्यात्मिक प्रवचन एवं सामूहिक साधना के माध्यम से मानसिक शांति और सकारात्मक जीवन मूल्यों का संदेश दिया गया।
अंबिकापुर (छत्तीसगढ़) में आयोजित कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी बी.के. विद्या दीदी ने राजयोग को अलौकिक विद्या बताते हुए कहा कि यह आत्मा और परमात्मा के संबंध के माध्यम से संस्कारों में परिवर्तन लाकर तनावमुक्त जीवन की कला सिखाता है। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, चिकित्सकों और समाजसेवियों ने अपने अनुभव साझा किए तथा प्रैक्टिकल मेडिटेशन कराया गया।
कानपुर (नयागंज एवं बर्रा-2) में ब्रह्माकुमारीज सेवा केंद्रों पर विशेष राजयोग सत्र आयोजित किए गए। वक्ताओं ने कहा कि राजयोग ध्यान न केवल व्यक्तिगत शांति प्रदान करता है, बल्कि विश्व शांति की स्थापना में भी सहायक है। सामूहिक ध्यान के माध्यम से शांति, प्रेम और सद्भाव का सकाश दिया गया।
गोला गोकर्णनाथ (खीरी) में आयोजित कार्यक्रम में राजयोग ध्यान के अभ्यास द्वारा मानसिक एवं आत्मिक शांति के महत्व को समझाया गया। वक्ताओं ने कहा कि योग और ध्यान आज की तनावपूर्ण जीवनशैली में संतुलन लाने का प्रभावी माध्यम है।
रीवा (मध्य प्रदेश) स्थित इन्द्रानगर उप-सेवा केंद्र में विश्व ध्यान दिवस श्रद्धा और शांत वातावरण में मनाया गया। सेवा केंद्र प्रभारी के मार्गदर्शन में बहनों ने राजयोग ध्यान कराया और नियमित ध्यान अपनाने की प्रेरणा दी। उपस्थित नागरिकों ने ध्यान के सकारात्मक अनुभव साझा किए।
इन सभी शहरों में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से मानसिक शांति, आत्मिक सशक्तिकरण, सामाजिक सद्भाव और विश्व एकता का संदेश व्यापक रूप से प्रसारित हुआ। विश्व ध्यान दिवस के अवसर पर ब्रह्माकुमारीज द्वारा किए गए ये आयोजन समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में प्रेरणादायक सिद्ध हुए।




























