27 दिसंबर 2025 , नवी मुंबई
नवी मुंबई के कोपरखैरने स्थित सेंट फ्रांसिस डी सेल्स चर्च में सिल्वर जुबली के उपलक्ष्य में साझा मूल्य, साझा भविष्य – शांति की ओर एक अंतरधार्मिक यात्रा विषय पर एक भव्य अंतरधार्मिक क्रिसमस समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न धर्मों एवं संस्कृतियों के बीच आपसी सद्भाव, शांति और एकता को सुदृढ़ करना था।
इस विशेष अवसर के मुख्य अतिथि माननीय बिशप ऑल्विन डी’सिल्वा रहे। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि
आज के समय में शांति केवल एक विचार नहीं, बल्कि जीवन की आवश्यकता है, और विभिन्न आस्थाओं के बीच संवाद ही स्थायी शांति का सशक्त मार्ग है।
कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी शीला दीदीजी ने राजयोग ध्यान के माध्यम से आंतरिक शांति, आत्मबल और वैश्विक एकता पर अपने प्रेरणादायक विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि ध्यान व्यक्ति को स्वयं से जोड़कर समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनाता है।
इस अंतरधार्मिक मंच पर विभिन्न धर्मों के प्रतिष्ठित प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें प्रमुख रूप से—
प्रो. वेणु गोपालकृष्ण,
श्री अयप्पा मंदिर, कोपरखैरने, नवी मुंबई के प्रतिनिधि,
आलम मोहम्मद सनूबर इमाम साहब, संस्थापक – दारुल उलूम फारूकिया एवं गुलशन-ए-मदीना, टिटवाला, तथा दारुल उलूम हनफिया गरीब नवाज़ एजुकेशनल एंड वेलफेयर ट्रस्ट,
पंडित श्री भगचंद जैन “शास्त्री”, जैन मंदिर, वाशी,
भाई सुखविंदर सिंह, हेड ग्रंथी – श्री दशमेश दरबार गुरुद्वारा, कोपरखैरने,
रेव. फादर के. पी. वर्गीस, विकार – सेंट थॉमस ऑर्थोडॉक्स अरमाना चर्च, वाशी एवं प्राचार्य – सेंट मेरीज़ मल्टीपर्पज हाई स्कूल एंड जूनियर कॉलेज, वाशी,
तथा फादर मारियो डी’सूज़ा (SFS), सेंट फ्रांसिस डी सेल्स चर्च, कोपरखैरने शामिल रहे।
सभी वक्ताओं ने अपने-अपने विचारों के माध्यम से यह संदेश दिया कि मानवता, करुणा, सेवा और प्रेम सभी धर्मों के मूल मूल्य हैं, और इन्हीं साझा मूल्यों के आधार पर एक शांतिपूर्ण भविष्य का निर्माण संभव है।
कार्यक्रम का समापन शांति, सौहार्द और वैश्विक भाईचारे के संकल्प के साथ हुआ। यह आयोजन नवी मुंबई में अंतरधार्मिक सद्भाव का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा।






















