22 नवम्बर 2025 , गुरुग्राम
ब्रह्माकुमारीज़ के भोड़ाकलां स्थित ओम शांति रिट्रीट सेंटर में शिक्षाविदों के तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारम्भ गुरुग्राम, 22 नवम्बर 2025 को हुआ। यह सम्मेलन संस्थान के शिक्षा प्रभाग द्वारा अवेकनेड एजुकेटर्स – इनलाइटेन्ड जेनरेशन विषय पर आयोजित किया गया, जिसमें 300 से अधिक शिक्षाविदों एवं विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता दर्ज कराई।
उद्घाटन सत्र में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के निदेशक डॉ. अमित दत्ता ने कहा कि देह भाव के कारण मनुष्य का ध्येय छोटा हो गया है। प्राचीन काल में शिक्षा समाज निर्माण का प्रमुख माध्यम थी, लेकिन आज सामाजिक संरचना के कमजोर होने से शिक्षा का प्रभाव कम होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षक के अंदर करुणा का होना अत्यंत आवश्यक है।
गुरुग्राम विश्वविद्यालय के कुलपति संजय कौशिक ने कहा कि स्वस्थ शरीर के लिए मन का स्वस्थ होना अनिवार्य है। आज बढ़ते अवसाद का कारण शिक्षा में नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों का अभाव है। उन्होंने ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा शिक्षा क्षेत्र में आध्यात्मिक मूल्यों के समावेश को एक अतुलनीय योगदान बताया।
ओआरसी की निदेशिका राजयोगिनी आशा दीदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि मनुष्य बहुत कुछ सीख चुका है, पर मनुष्य की तरह जीना भूल गया है। जागरूकता हमें स्वयं से जोड़ती है एवं रचनात्मक बनाती है। एक अच्छे शिक्षक के भीतर अच्छा विद्यार्थी भी होना जरूरी है। योग के माध्यम से हम अपने आंतरिक स्वरूप को पहचानते हैं और शिक्षक एक निर्माता की भूमिका निभाता है।
दिल्ली हरीनगर सेवाकेंद्रों की निदेशिका राजयोगिनी शुक्ला दीदी ने कहा कि शिक्षक का जीवन पूरे समाज के लिए प्रेरणा है। मूल्यों से युक्त जागरूक शिक्षक ही सही दिशा प्रदान कर सकता है तथा समाज में संतुलन स्थापित कर सकता है।
जेबीएम विश्वविद्यालय के अध्यक्ष गुरुदत्त अरोड़ा ने कहा कि समाज परिवर्तन विचार परिवर्तन के बिना संभव नहीं है। धर्म वह माध्यम है जो संस्कारों की शिक्षा देता है और हमें सुसंस्कृत बनाता है।
महाराजा अग्रसेन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के उपाध्यक्ष एस.पी. गोयल ने कहा कि खुशहाल जीवन के लिए योग और आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाना आवश्यक है।
कार्यक्रम में नॉर्थ कैंप यूनिवर्सिटी, दिल्ली की कुलपति नूपुर प्रकाश और इग्नू, जयपुर के सहायक क्षेत्रीय निदेशक डॉ. कमलेश मीणा भी उपस्थित रहे।
शिक्षा प्रभाग की राष्ट्रीय संयोजिका बीके सुदेश ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। माउंट आबू से पधारी प्रभाग की राष्ट्रीय संयोजिका बीके सुमन ने शिक्षा प्रभाग द्वारा की जा रही सेवाओं की जानकारी दी। दिल्ली जोन की संयोजिका बीके विजया ने राजयोग की गहन अनुभूति कराई तथा बीके चांद ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। मंच संचालन बीके दिव्या ने किया। मंचासीन अतिथियों का सम्मान तिलक, पटका तथा तुलसी पौधा भेंटकर किया गया।
यह तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन शिक्षकों में आध्यात्मिकता, जागरूकता एवं मूल्यनिष्ठ शिक्षा के संकल्प को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।































