9 दिसंबर 2025, श्रीनगर — हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के एसीएल हॉल में ब्रह्माकुमारीज़ के स्थानीय सेवा केंद्र द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में एक भव्य राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का मुख्य विषय रहा: “विद्यार्थियों में मानवीय मूल्यों का अभाव — शिक्षा की सबसे बड़ी चुनौती।”
इस विषय पर देशभर से पधारे आध्यात्मिक शिक्षा एवं मूल्य शिक्षण के विशेषज्ञों ने विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया और विद्यालय स्तर से ही विद्यार्थियों में चरित्र, संस्कार एवं नैतिक चेतना को दृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम में प्रदेश के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि
संस्कारवान और आदर्श युवा ही राष्ट्र के भविष्य को मजबूत बना सकते हैं। उन्होंने ब्रह्माकुमारी संस्थान की वैश्विक स्तर पर आध्यात्म और मूल्य शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। अपने वक्तव्य में उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालयों में बच्चों के अवसाद की चर्चा सामान्य है, लेकिन ब्रह्माकुमारीज़ के कार्यक्रमों में आने पर ऐसा लगता है कि मनोविज्ञान की आवश्यकता ही नहीं पड़ती, क्योंकि यहां सभी प्रसन्नचित्त और सकारात्मक ऊर्जा से भरे हुए दिखाई देते हैं। उन्होंने यह अनुभव भी साझा किया कि मात्र पाँच मिनट के मेडिटेशन से उन्हें अद्भुत शांति और विस्तार का एहसास हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलसचिव प्रो. राकेश कुमार धोड़ी ने की। इस अवसर पर शिक्षा प्रभाग क्षेत्रीय संयोजिका बीके ममता, क्षेत्रीय निदेशक बीके मेहरचंद, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर के निदेशक प्रो. सुब्रमण्यम, गढ़वाल विश्वविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राकेश, राजयोगा थॉट लैब के निदेशक बीके मुकेश, तथा सुप्रसिद्ध गायक बीके पुनीत, बीके नेहा, बीके शिव कुमार, बीके नीलम समेत अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम से पूर्व ब्रह्माकुमार भाई-बहनों ने श्रीनगर सेवा केंद्र से कार्यक्रम स्थल तक प्रभात फेरी निकालकर भारतीय जीवनशैली और मूल्यों की प्रेरक झलक प्रस्तुत की। वक्ताओं ने बताया कि भारतीय संस्कृति का प्रत्येक कण मूल्य-प्रधान है, और व्यक्ति अपने वाणी, वस्त्र, आचरण व व्यवहार में इन मूल्यों को धारण कर सम्मान अर्जित कर सकता है। सम्मान किसी बाहरी साधन जैसे वाहन या मोबाइल से नहीं, बल्कि अपने संस्कारों और जीवनशैली से प्राप्त होता है।
यह राष्ट्रीय सम्मेलन मूल्य-आधारित शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में एक सराहनीय एवं प्रेरणादायक पहल सिद्ध हुआ।




























