दिनांक 25 अप्रैल 2026 को ब्रह्माकुमारीज़ संस्था की वराछा रोड शाखा द्वारा आर्ट एंड कल्चर विंग के अंतर्गत कला और संस्कृति के क्षेत्र से जुड़े चित्रकारों, संगीतकारों, गीतकारों, लेखकों एवं नृत्य कलाकारों के लिए “संस्कृति रक्षण से संस्कार निर्माण - कलाकार बनें आधार” विषय पर एक भव्य सेमिनार का आयोजन लंबे हनुमान रोड स्थित स्वामी विवेकानंद ऑडिटोरियम में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
इस विशेष एवं यादगार सेमिनार में भ्राता वैभवभाई देसाई (प्रसिद्ध नाट्यकार), भ्राता हेमंगभाई व्यास (चेयरमैन, सप्तध्वनि कलावृंदा), बहन रेशमा नागर (कथक नृत्यांगना), बहन नयना कत्रोडिया (ट्रिपल वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर), भ्राता रमणिकभाई झापड़िया (चेयरमैन, कलातीर्थ ट्रस्ट), ब्रह्माकुमारी गीताबेन (डायरेक्टर, भीनमाल सेवा केंद्र, राजस्थान), ब्रह्माकुमारी तृप्तिबेन सहित अनेक गणमान्य अतिथियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आए कलाकारों की उपस्थिति से पूरा ऑडिटोरियम उत्साह और ऊर्जा से भर गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ ब्रह्माकुमारी श्वेताबेन द्वारा ओमकार ध्वनि एवं ध्यान अनुभूति के साथ किया गया। तत्पश्चात ब्रह्माकुमारी तृप्तिबेन ने सभी का हार्दिक स्वागत करते हुए कलाकारों के समाज में योगदान की सराहना की और कहा कि कला के माध्यम से आप सभी विश्व को तनाव, चिंता और अशांति से मुक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने इस अवसर पर परमात्मा शिव, जो सर्वोच्च कलाकार हैं, का आह्वान भी किया।
अपने मुख्य उद्बोधन में ब्रह्माकुमारी गीताबेन ने कलाकारों को संबोधित करते हुए कहा कि आप सभी मनोरंजन के साथ यदि अध्यात्म को भी अपने कार्य में सम्मिलित करें, तो आपके माध्यम से यह संसार एक सुनहरी दुनिया में परिवर्तित हो सकता है।
इस सेमिनार के माध्यम से सूरत जिले के 300 से अधिक कलाकारों ने लाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम के अंत में पसोदरा सेवा केंद्र की डायरेक्टर ब्रह्माकुमारी हर्षाबेन ने सभी का आभार व्यक्त किया। ब्रह्माकुमारी सोनलबेन ने सभी उपस्थित जनों को श्रेष्ठ संकल्प दिलाते हुए प्रेरित किया। संपूर्ण कार्यक्रम का सफल संचालन कामरेज सेवा केंद्र की डायरेक्टर ब्रह्माकुमारी रीमाबेन द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के समापन पर सभी को ईश्वरीय सौगात प्रदान कर सम्मानित किया गया तथा सभी ने पवित्र ब्रह्मभोजन ग्रहण किया। यह संपूर्ण आयोजन ब्रह्माकुमारी तृप्तिबेन के नेतृत्व में अत्यंत सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।





























