6 मार्च 2026 को वाराणसी और पश्चिम नेपाल सबज़ोन की प्रभारी राजयोगिनी आदरणीय सुरेंद्र दीदी जी ने अपने भौतिक शरीर का त्याग कर बाबा की गोद में स्थान ग्रहण किया। 13 जून 1943 को पंजाब के हरगोविंदपुर में जन्मी सुरेंद्र दीदी जी का जीवन बचपन से ही आध्यात्मिकता की ओर समर्पित रहा। मात्र 13 वर्ष की आयु में सन 1957 में उनका संपर्क ब्रह्मा बाबा से हुआ और उसी क्षण से उन्होंने अपने जीवन को ईश्वरीय सेवाओं के लिए समर्पित कर दिया।
ब्रह्मा बाबा ने उनके शांत स्वभाव, योग शक्ति और सेवा भावना को देखते हुए उन्हें वाराणसी में सेवाओं के विस्तार के लिए भेजा। परमात्मा शिव की साक्षात्कार नगरी वाराणसी में रहकर उन्होंने अपने तप, त्याग और मौन की शक्ति से हजारों लोगों को राजयोग और आध्यात्मिक ज्ञान से जोड़ा। काशी की पावन भूमि पर उन्होंने अनेक साधु-संतों और आम जनमानस को परमात्मा के ज्ञान का अनुभव कराया।
आदरणीय सुरेंद्र दीदी जी के कुशल निर्देशन में पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिम नेपाल क्षेत्र में लगभग 200 सेवा केंद्र स्थापित हुए। इन केंद्रों के माध्यम से हजारों-लाखों लोगों के जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन आया। उनके स्नेहिल मार्गदर्शन में ब्रह्मकुमारी भाई-बहनों का विशाल परिवार तैयार हुआ, जो आज भी समाज में आध्यात्मिक मूल्यों का संदेश फैला रहा है।
उनकी उत्कृष्ट सेवाओं और आध्यात्मिक योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मानों से भी सम्मानित किया गया। उनका संपूर्ण जीवन सेवा, त्याग, सादगी और योग की शक्ति का प्रेरणादायक उदाहरण रहा।
आदरणीय सुरेंद्र दीदी जी का अंतिम संस्कार 8 मार्च 2026 को वाराणसी के सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र घाट पर हजारों भाई-बहनों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति में किया जाएगा। ऐसी महान सेवाधारी आत्मा को कोटि-कोटि नमन।























