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परमात्मा से जुड़कर अपनी दिव्यता का अनुभव करने का पर्व (भाग 2)

October 16, 2023

परमात्मा से जुड़कर अपनी दिव्यता का अनुभव करने का पर्व (भाग 2)

नवरात्रि (15 – 23 अक्टूबर) पर विशेष आध्यत्मिक संदेश

दिया/ दीपक:

यह हमें याद दिलाता है कि, हमारा  शरीर भौतिक तत्वों (फिजिकल एलिमेंट्स) से बना है जबकि आत्मा एक आध्यात्मिक प्रकाश है। नवरात्रि में 9 दिनो तक दिए को जलाए रखने का अर्थ है कि, हमें अपने आत्मिक सत्य को जागृत करके फिजिकल लेवल पर जो कुछ भी हमने अर्जित किया है;  शरीर, धन, रिश्ते नाते, भूमिकाएँ आदि उनका अहंकार छोड़ना।

उपवास/ फास्टिंग:

नवरात्रि में उपवास करने का रियल अर्थ है कि, ऊपर आत्म जगत में रहने वाले परमात्मा से जुडकर उनकी नजदीकियों को महसूस करना। उनके साथ अपने इस यूनिक संबंध की शक्ति द्वारा स्वयं से यह प्रतिज्ञा करना कि, हम अपने किसी भी थॉट, बोल और कर्म में बुराइयों का उपयोग नहीं करेंगे और नाही कभी भी दूसरों के प्रति नकारात्मकता फैलाएंगे। इस प्रकार का उपवास हम अपने जीवन में स्थाई रूप से रखकर एक सच्चा सच्चा उपवास करेंगे।

सात्विक भोजन और पवित्रता :

इन दिनों में हम जो कुछ भी देखते हैं, पढ़ते हैं, सुनते हैं, बोलते हैं, खाते हैं वा पीते हैं; वह हमारी आत्मा और शरीर दोनों की शुद्धता बढ़ाने के लिए हाई स्पिरिचुअल एनर्जी से भरपूर होना चाहिए।

जागरण :

माना अंधकार जिसका रियल अर्थ है कि, जीवन में वैल्यूस के प्रकाश के ना होने की वजह से, सही और गलत में अंतर ना कर पाने की अज्ञानता का प्रतीक है। इसलिए यहां जागरण का अर्थ है कि, परमात्मा बताए गए आध्यत्मिक ज्ञान के आधार पर, सही ढंग से सोचने और जीवन जीने के एक नए तरीके के प्रति जागृत होना और उसे अपने जीवन में आत्मसात करना।

रास या गरबा नृत्य :

नृत्य का एक फॉर्म; जहां एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति के साथ, कदमों की तालमेल बिठानी होती है। इसमें अगर कोई भी स्टेप मिस हो जाए, तो डांस खराब हो जाता है और चोट भी लग सकती है। यह नृत्य हमारे रिश्तों का प्रतीक है, जिसमें हम दूसरे के संस्कारों के अनुसार स्वयं को ढालते हैं, जिसे “संस्कारों की रास” भी कहा जाता है। रिश्तों में तालमेल बिठाते हुए और सहन करते हुए; जीवन एक खुशहाल नृत्य बन जाएगा, अन्यथा यह संघर्ष में भी बदल सकता है।

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