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यह पुस्तक 1958 से 1963 तक मम्मा द्वारा उच्चारित महावाक्यों का संकलन है। मम्मा ने ईश्वरीय ज्ञान को सरल भाषा में समझाते हुए यह भी बताया कि वाणी सेवा कैसे करें और क्या बोलें। इसका अध्ययन आत्मा को ज्ञानयुक्त बोलचाल, प्रभावशाली सेवा और दूसरों को गहराई से समझाने की कला सिखाता है।