
दादी जी के समान प्रभावमुक्त बनना, न किसी के प्रभाव में आना, न अपना प्रभाव डालना
1) मीठी-मीठी दादी के लिए हर एक के दिल का आवाज है -सबसे न्यारी और सबकी प्यारी। बाबा के हम सब बच्चे हैं, पर हमारी दादी सबसे न्यारी, सबसे प्यारी बाप समान। पहले हमको बाबा कहता था आप समान बनाओ, अव्यक्त होकर कहा बाप समान बनो। तो आप समान बनाने में दादी बहुत होशियार थी। मैं ही बनूं, नहीं, मेरे समान बनें। परन्तु बाप समान बनने में नम्बरवन गई। इतना हर बात में न्यारा और प्यारा, न्यारा बनने के बिगर प्यारा नहीं बन सकते, प्यारा बनने बिगर न्यारा नहीं दिखाई पड़ता।
2) दादी जी ने यही लक्ष्य रखा कि मुझे किसी के बुरे व अच्छे प्रभाव में नहीं आना है। न किसी पर अपना प्रभाव डालना है, न किसी के प्रभाव में आना है। यह सूक्ष्म अति प्यार से दादी का वरदान वा गिफ्ट ले लो। प्रभाव मुक्त बन जाओ।
3) दादी ने सच्ची दिल से साहेब को अपना बनाके रखा। ईश्वरीय परिवार के संगठन की शक्ति को बढ़ाया। बाबा बाबा है, मम्मा मम्मा है, पर इतनी जो वृद्धि हुई है, दादी जी इतना वृद्धि करने के निमित्त बनी है, संगठन की शक्ति को स्वमान में रहकर सम्मान देकर आगे बढ़ाया है। सतयुगी दुनिया कैसी स्नेह सम्पन्न, सुख शान्ति सम्पन्न होगी, वह दादी ने यहाँ करके दिखाया है।
4) दादी जी ने यज्ञ सेवा में सबको साथी बनाकर स्नेह से, यज्ञ के फाउण्डेशन को मजबूत बना दिया। जैसे कल बाबा ने कहा वृक्ष के तने आप हो, आप के ऊपर सारा झाड खड़ा है। जैसे बाबा ग्रेट ग्रेट ग्रैण्ड फादर है, ऐसे हम भी ग्रेट हैं। अन्दर से पानी पत्तों को मिलता है। हम सबको अनुभव करने का भाग्य मिला है। भाग्यवान हैं जिन्होंने दादी के संग, दादी की पालना ली है। हमारे रग-रग में बाबा की शिक्षायें, समझानी और सावधानी दादी ने भर दी है।
5) तो मीठी दादी की याद में, प्यार में श्रद्धा भाव से सच्चा बनने का व्रत ले लो। सच्चा बनना है तो कैसे बनना है, उसके बिगर तात लात और कोई बात न हो। तात अन्दर की, लात लगन, बात मुख की। तो मैं प्यारी मीठी दादी की याद में अपने भाई बहिनों को कहती हूँ - अपनी घोट तो नशा चढ़े, जो ओटे सो अर्जुन, करना है तो अब कर ले, तीन बातें याद रखना। मुझे करना है, जो ओटे सो अर्जुन, हर एक कर सकता है। अपनी घोट, जो ज्ञान बाबा देता है उसका मनन चिंतन करके, ज्ञान का सिमरण करके, सिमरणी में आने के लिए स्मृति स्वरूप बनने का ध्यान रखना है। सिमरणी में आना है तो ज्ञान के सिमरण से व्यर्थ से फ्री होना है।
6) ज्ञान बल, योग बल, जो सेवा में काम आता है। बल जो जमा होता है उससे धारणा हो जाती है। धारणा का प्रभाव जल्दी पड़ता है। समझने की इच्छा पीछे पैदा होती है। संबंध में आये, प्राप्ति हुई तो लगता है यह मेरे काम की बात है। दिल कहती है यही सुनना है, यही समझना है, यही जीवन में लाना है। बाबा का एक-एक बोल अनमोल है। बाबा के बोल का मूल्य कथन नहीं कर सकते हैं। बाबा का एक-एक बोल मुझे याद आता है। जो बाप की महिमा है उसमें आप समान बनाने चाहता है। जैसे दादी को बनाया, ऐसे हम सबको भी बनना है।
7) जैसे अभी मीठी दादी ने अपना रूप बदल करके, साकारी रूप से अव्यक्त हो करके, बापदादा के साथ इकट्ठा इशारे दे रही है। दादी जी से सबका प्यार और रिगार्ड है। प्यार उसको ही कहा जाता है जब दिल में रिगार्ड हो।
8) हमारी पढ़ाई है ही टेन्शन फ्री रहने के लिए। टेन्शन फ्री रहने की पढ़ाई है, उसके लिए हम रोज़ दादी के कितने गुण वर्णन करें। सभी ने दादी को अच्छी तरह से देखा है। हम सिर्फ सावधान रहें, इतना बाबा ने समझाया है, सिखाया है। सावधानी की सीढ़ी पर चढ़ते चलें, सावधानी की सीढ़ी है, चढ़े सो उतरे पार। चढ़ेंगे तो उतरेंगे, यहाँ नहीं उतरेंगे, पार चले जायेंगे। परमधाम निवासी होकर रहेंगे। शान्तिधाम में बहुत थोड़ा समय रहते हैं क्योंकि कर्मयोगी हैं। पवित्रता शान्ति में लेकर जाती है। शान्ति से सुखमय राज्य स्थापन करने में बाबा के मददगार बनते हैं।
9) आजकल बाबा कहता है याद रखो मुझे घर चलना है। सारा दिन देखें, अपने आपको चेक करें मैं घर जाने के लिए तैयारी कर रही हूँ, जा रही हूँ या पहुंचकर बाबा के नजदीक रहती हूँ। घर के पास हैं, माना बाबा के पास हैं। तो पास होने का सर्टीफिकेट बाबा देता है। एक तरफ पवित्रता, योग युक्त बनने में बहुत मदद करती है। साकार में मीठे बाबा के यह बोल हैं, पवित्रता से योग, योग से बल जो मिलता है वह कमाल का काम करता है। पहले तो हमारे विकर्म सारे विनाश हो जाते हैं और कोई हिसाब-किताब किसके साथ न रहे, पुराना तो चुक्तू, अभी भी किसके साथ कोई हिसाब-किताब नहीं। कर्मबन्धन का हिसाब-किताब जुड़ता है तो तोड़ना मुश्किल हो जाता है। यह तोड़-जोड़ का धन्धा टाइम वेस्ट करता है।
10) सतयुग के लिए पुण्य कर्म, श्रेष्ठ कर्म करें और योगी भी रहें, सतयुग में जाने के लिए अति श्रेष्ठ कर्म की लिस्ट हमारे पास हो। दादी प्रैक्टिकल हमारे सामने पालना के निमित्त बनी, पढ़ाई पर सबका ध्यान खिंचवाया। मुरली से इतना प्यार, मुरली कितनी बार पढ़ती और सबको सुनाती। फिर बाबा के साथ पूरा कनेक्शन। जब कनेक्शन बाबा से है, तो आटोमेटिक लाइट बन जाते हैं और माइट अपने आप काम करती है, सेवा में भी सर्वशक्तिवान की शक्ति काम करती है। सर्वशक्तिवान हमारा बाबा है, कहता है मेरा काम मैं जानूं, तू अपना काम कर। तुम सिर्फ सतयुगी राजाई करने के लायक बनो।
11) दादी पवित्रता की देवी थी। पवित्रता के योगबल से उन्होंने स्वयं में सर्वशक्तियां धारण की। इसी से सभी विकार भी खत्म हो गये, अवगुण भी चले गये। तो हम सब भी दादी के समान ऐसा इन्स्ट्रुमेंट बनें जो बाबा मेरे को निमित्त बनाकर आपेही सेवा कराये। सेवा के चिंतन में भी माया घुसती है। चिंता कोई नहीं है लेकिन चिंतन में माया कैसे आती है, वह अच्छी तरह चेक करना पड़े। अपने आपको शुभ श्रेष्ठ चिंतन में रखना, बाकी सबके लिए शुभचिंतक रहना, हर एक का जिम्मेवार बाबा है, हम बहन भाई हैं।
12) आज बाबा ने कहा तुम शान्ति में कहाँ तक रहेंगे क्योंकि तुम कर्म और योगी हो। योगयुक्त रहने से जो तुम्हारे द्वारा कर्म होगा उनको देख और करेंगे तो दुआयें मिलेंगी। हमारे ऐसे कर्म हों जो सब दुआ देवें। एक हॉबी हो दुआओं का खजाना इकट्ठा करने की। ज्ञान का खजाना मिला है, गुणों को यूज़ करें, गुणवान बनें, किसका अवगुण न देखें, न चित्त पर रखें।
13) एक हैं माया के तूफान, दूसरे हैं माया के विघ्न, तीसरी है माया की ग्रहचारी। दादी के लिए जो बाबा ने कहा सदा निर्विघ्न रही है, निर्विकल्प रही है, निर्मल स्वभाव रखा है। यह तो हम सबने आंखों से देखा है। निर्विकल्प और निर्विघ्न, निर्विकल्प बड़ी समाधि है। निर्विकल्प, जरा भी कभी कोई विकल्प न आये। अभी सिर्फ याद करेंगे या प्रैक्टिकल करके दिखायेंगे। तो ऐसा पुरुषार्थ करके सफलता मूर्त बनने के लिए दादी याद आयेगी। जैसे दादी सफलता मूर्त रही है, ऐसे हम भी सफलता का सितारा बन जायें।
14) दादी चमकने वाला सितारा बनी, प्रकाशमणि । हम सफलता का सितारा तो बन जायें, मन वचन कर्म श्रेष्ठ हो, सफल हो, हम कितनी मन की दिल की बातें सुनायें, क्योंकि हमारा बहन भाईयों से परिवार से बहुत प्यार है और क्या बोलें। यही बोल जो बाबा ने सिखाये हैं, हम दादी के साथ रहकर जो सीखे हैं, वह अपने इस जीवन द्वारा साकार करेंगे।
15) साकारी रूप में हम सब बाबा की प्रेरणाओं को जीवन में ऐसे लायें जो हमारा निमित्त पार्ट अनेक आत्माओं को अच्छा करने के लिए प्रेरणा दे। किसकी ग्रहचारी या विघ्न हट जाये, संकल्प में शुद्धि श्रेष्ठता का सहयोग मिल जाए। यह सूक्ष्म सच्ची दिल से सेवा करने वाले को बाबा कितना साथ देता है, दिया है वह भी अनुभवी जाने।
16) दादी ने फॉलो फादर, सी फादर किया है, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण अपनी जीवन से दिखाया है। तो हमको भी अभी वही करना है, जैसे दादी ने करके दिखाया है। मीठे बाबा ने तो क्या पुरुषार्थ करना है, कैसे पुरुषार्थ करना है वो सब बताया है, बताते ही रहते हैं। जैसे ईश्वरीय सन्तान हूँ, ब्रह्मा मुख वंशावली ब्राह्मण हूँ, यह नशा हो। परमात्मा बाप तो ऊंचे ते ऊंचा है, उसकी मैं सन्तान हूँ। तो जो बाबा हमें सुनाता है, वही करना है। इससे समय, संकल्प स्वतः ही सफल होते हैं क्योंकि संगम का एक सेकण्ड भी एक वर्ष के बराबर है। अगर एक सेकण्ड भी असफल हुआ तो बहुत नुकसान हो जायेगा, तो यह कमाई करने का समय है। संगमयुग की स्मृति जो है वो बाबा और घर की याद दिलाती है, जिससे बहुत कमाल और कमाई कर सकते हैं। अपने पास और कुछ नहीं है तो कोई हर्जा नहीं, पर संगम पर संकल्प से समय तो सफल कर सकते हैं। और कुछ न करें सिर्फ बाबा को नकल तो करें।
17) बाबा मम्मा ने जैसे डायरेक्शन पर चलाया, उसी अनुसार दादी ने किया। तो सदा सुखी वो रहे हैं जो हाँ जी कहते हैं। अन्दर से अपने से सूक्ष्म सच्चा प्यार है तो बाबा की बातें प्यार से स्वीकर करना, यह ऑटोमेटिक होती हैं। जो बाबा और दादी से पाया है उसका गायन सभी दिल से करते हैं। दादियों ने बाबा को दिल में रखा है तभी दादी ऐसे बनी है। बाकी ऐसे ही कोई कहे मैं दादा, दादी बनूँ तो नहीं बन सकता। तो दादी से प्रैक्टिकली प्यार है तो अपने को प्यार करो और दिल से दुआयें स्वीकार करो।
18) कईयों को कोई-न-कोई प्रकार का दुःख अन्दर बैठ गया है, वह दुःख दुआ को यूज़ करने नहीं देता है। दादी को सभी इसलिए प्यार करते हैं कि दादी ने कभी किसी को दुःख नहीं दिया है और लिया भी कभी नहीं है। अन्दर थोड़ा भी दुःख है तो वो सबकुछ होते भी सुखी होने नहीं देगा। जो सदा सन्तुष्ट है वो सदा प्रसन्न है। यह बातें बड़े प्यार से अपने आपको समझा करके सम्पन्न बना लेवें।
19) गुणग्राही बनने में बड़ा सुख है। किसी का अवगुण न देखो, सोचो भी नहीं तो सुखी हैं। जिस घड़ी जिसका अवगुण देखा, रिटर्न देना है तो प्लीज़ कभी दुःख नहीं लेना। बाबा से जो वरदान सोचा तो वो हमें दुःखी बनाता है। तो अगर दादी को प्यार का मिले हैं वही हमारी सूरत मूरत में हों। मुरली में रोज़ जो वरदान मिलते हैं उसको भी अगर हम दिल में रखें तो भी हम ब्राह्मणों की शक्ल देवताओं से भी अच्छी दिखाई देने लगेगी।
20) बाबा कहते हैं ज्ञान देना सहज है परन्तु सर्वशक्तिवान बाबा से जो शक्ति पाई है, वो देना बहुत बड़ी बात है क्योंकि कई आत्माओं को सूक्ष्म शक्ति की जरुरत है। दोनों बाप हमको अपने से भी ऊंचा बनाते हैं, इतनी ऊंची बातें दिल में धारण करें तो कितना बाबा का प्यार मिलेगा, वही शक्ति का काम करेगा। दादी के लिए आता है कि जिसकी रचना इतनी सुन्दर वो कितना सुन्दर होगा...।
21) बाबा जो कहता है वही करना है। जो बाबा ने किया है, वही करना है। चलना-फिरना, उठना-बैठना... इसमें न कोई अपना विचार, न कोई संस्कार...। समझ से निश्चय का बल अगर है तो कोई क्वेश्चन नहीं उठ सकता है। जरा सा भी क्यों क्या है तो समथिंग रांग है। ड्रामा की हर सीन में कल्याण समाया हुआ है इसलिए बुद्धि जरा भी हलचल में न आये, तो ऐसे अटल विश्वास वाले बाबा के बच्चे अचल अडोल स्थिति से सदा सच्चे सेवाधारी होते हैं। वे कभी कोई परिस्थिति से परेशान नहीं होते।
22) भावना में कुछ गड़बड़ है तो नुकसान अपने को ही है। देने वाला दे रहा है, लेने वाले को सिर्फ स्वच्छ बुद्धि से लेना है। तो भगवान के महावाक्यों को स्वच्छ बुद्धि से धारण करना। अगर बुद्धि स्वच्छ नहीं है तो अन्दर ज्ञान जाता ही नहीं है। इसमें देने वाले दाता का दोष नहीं है, लेने वाले का है क्योंकि इतना अक्ल नहीं है जो मलीन बुद्धि की सफाई करे क्योंकि जरा सा भी मैलापन है, तो भगवान का प्यार नहीं मिल सकता। तो जो बाबा ने मुख से बोल उच्चारण किये हैं वही दादी ने किया और कराया है इसलिए हम सब सुखी हैं।
23) स्वच्छता और सच्चाई ब्राह्मणों की शान है। स्वच्छता तन मन को हेल्दी बनाती है। हेल्दी माइन्ड है तो हेल्दी बॉडी है और सम्बन्ध में भी जहाँ भी जिसके साथ भी रहो वहाँ वो खुश है। वह अपने और दूसरों के स्वभाव-संस्कार को जानते हुए सबके साथ मिल करके चलते हैं। वह न्यारे और सदा स्वच्छ हैं, जिसकी आकर्षण से लोग कहेंगे यह दिल के बड़े साफ हैं, सरल हैं। कारोबार में सच्चे हैं। तो भगवान की इतनी मेहरबानी है जो इतना दिया है, मंगता से दाता बना दिया। अच्छा।
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