अपने भाग्य और भाग्यविधाता बाप को याद कर रुहानी मौज का अनुभव करो
Dadi Gulzar Ji·2002 · Hindiभाग्य की सच्ची स्मृति आत्मा को साधारण जीवन से उठाकर रूहानी मौज, उमंग और जिम्मेदारी की स्थिति में ले जाती है। जब हम याद रखते हैं कि स्वयं भगवान ने हमें अपना बनाया, यज्ञ सेवा का अवसर दिया और ऊँचा भाग्य बनाने का चान्स दिया है, तब व्यर्थ संकल्प, अलबेलापन और दिलशिकस्ती के लिए स्थान नहीं रहता। भगवान और अपने भाग्य को याद रखते हुए लक्ष्य के अनुरूप लक्षण बनाना ही संगमयुग की कमाई है।