परचिन्तन-परदर्शन आत्मा को भटकाने वाली गलियां है, इन गलियों को बन्द करने के लिए परोपकारी बनो
Dadi Gulzar Ji·1994 · Hindiपरचिन्तन और परदर्शन वे सूक्ष्म गलियाँ हैं जो बुद्धि को बाबा से भटकाकर व्यर्थ संकल्पों में ले जाती हैं; इन गलियों को बन्द करने का सहज साधन है—परोपकारी बनना। जब सर्व सम्बन्ध और सर्व प्राप्तियाँ एक बाबा से अनुभव होती हैं, तब बुद्धि स्वतः एकाग्र रहती है और जीवन में प्रश्नों के स्थान पर प्रसन्नता आती है। “एक बाबा दूसरा न कोई” की स्मृति ही आत्मा को मौज, शक्ति और सदा विजय की स्थिति में रखती है।