अव्यक्त मुरली
... मैंपन को भूल ट्रस्टी बन जाओ। जिम्मेवारी बाप को दे दो और स्वयं दिल के सच्चे बच्चे बन खाओ, खेलो और मौज करो क्योंकि यह संगमयुग सभी युग में से मौजों का युग है ...
18 January 2008
हिंदी
Consciousness of "me"
‘‘నేను’’ అన్న భావన
"मैं" का भाव