संस्कृत
... अब फिर से अनादि संस्कार उड़ते पंछी के इमर्ज करो। अर्थात् फरिश्ते रूप में स्थित रहो। ... (अव्यक्त मुरली - 17 October 1981)
पक्षी
Bird
పక్షి