संस्कृत
... विकारों रूपी साँप ही अधीन हो गये अर्थात् शैया बन गये तो निश्चिन्त हो गये ना। जो विजयी होते हैं वह सदा निश्चिन्त विष्णु के समान सदा हर्षित रहते हैं। ... (अव्यक्त मुरली - 12 December 1979)
खाट; पलंग
Bed
పానుపు; శయ్య; మంచము