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007 Nimmit Aur Nirman Sthiti
Spiritual Classes

007 Nimmit Aur Nirman Sthiti

Dadi Gulzar Ji
49:02164
007 Nimmit Aur Nirman Sthiti
Spiritual Classes
007 Nimmit Aur Nirman Sthiti
Dadi Gulzar Ji
49:02164 plays

Essence

सबको सहज पुरुषार्थ अच्छा लगता है। इसके लिए सब कुछ बाबा को सौंप दो। जैसे भक्ति में कहते हैं कि तेरा तुझको....मेरा कुछ भी नहीं—लेकिन जब ज्ञान मिल है, तो सहज पुरुषार्थ का मतलब ही है कि सब बाबा को सौंप देना। यदि हमने बाबा को जिम्मेदारी दे दी है तो हम बेफिक्र बन जाएँगे, मेरापन नहीं रहेगा। इसे निमित्त भाव Trustee भाव कहा जाता है (मेरापन मतलब ग्रहस्थी)। निमित्त बनने से दुःख और अशान्ति की लहर नहीं आएगी।
जब हम मधुबन में सेवा के लिए जाते हैं तो हमें भंडारे से पूरा स्टॉक मिलता है। लेकिन हमें पता है कि हम यहाँ पंद्रह दिन की सेवा के लिए आए हैं, तो मेरापन नहीं आता है क्योंकि हम निमित्त भाव से सेवा कर रहे हैं, तो ममता(मोह) नहीं होती। निमित्त भाव समझने से अपमान नहीं आता।
निमित्त भाव समझो तो यह प्रभूप्रसाद है। निमित्त भाव माना तन–मन–धन सब बाबा को दे दिया। निमित्त बनना मतलब निर्माण बनना।

निमित्त भाव से ही सफलता होती है क्योंकि हमें निमित्त बनाने वाला सर्वशक्तिवान बाबा है। परमात्मा की याद में रहने से हमारे हर कर्म में सफलता है—‘मैं’पन आने से सफलता कम है।
अगर निमित्त भाव है तो (यह ज्ञान इमर्ज है की) हमारी जो विशेषता है वह हमारी नहीं है; बाबा ने हमें दी है। बाबा ने हमें ज्ञान दिया है जो हम औरों को देते हैं।
अभिमान की निशानी है कि हमें अपमान की feeling आती है।

जब किसी सेवा के लिए हम जाते हो तो बाबा से कहो कि आपको जो सेवा मेरे पास से करानी है वह कराओ। अपने पर नहीं लेना है; बाबा जिम्मेदार है और हम निमित्त हैं।
फर्ज अदाई में ‘मैं’पन आ सकता है, लेकिन फर्ज-अदाई भी Trustee बनकर करो। ‘मेरे’ में मोह होता है।
किसी और का नुकसान होता है तो हमें लगता है कि ऐसा नहीं होना चाहिए था—तो वह मोह नहीं है, दुःख भी अंदर से नहीं होता है। लेकिन जब अपना नुकसान होता है, तब समझ में आता है कि हम में मोह है कि नहीं; सूक्ष्म रूप में मेरा मोह कहीं अटका तो नहीं है। अगर ‘मैं’पन है तो अन्त समय में यही कमज़ोरी बनकर आएगी।
कोई भी इच्छा रही होगी तो यह अन्त समय में वही कमज़ोरी बनकर आएगी।
बहुत काल का अभ्यास नहीं होता है तो जब समस्या आती है और हम योग लगाना चाहते हैं तो कितनी भी कोशिश करेंगे लेकिन योग नहीं लगता।
हमने माया को चैलेंज किया है कि हम मायाजीत बनेंगे, इसलिए माया भी वार करती है। माया ने 63 साल राज्य किया है तो वह अपना राज ऐसे ही नहीं छोड़ेगी। हम ब्राह्मणों ने चैलेंज किया है, तो माया जरूर आएगी। माया को पता है कि हमारा कौन-सा दरवाजा खुला है, तो माया वहीं से आएगी। पेपर वहीं से आएगा।
हमें है मास्टर सर्वशक्तिमान, तो हमें अपनी चेकिंग करनी है—जो कमजोरी है उसके लिए पुरुषार्थ करना है।
Trustee बनकर रहो, बाबा को निमित्त बनाओ। योग में बैठते हो तो याद करने से ज़्यादा फरियाद करते हो तो योग नहीं लगेगा। अपने को Check करो और change भी करो।

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