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015-Atmik Smruti evam Atmik Dristi-23-11-01
Spiritual Classes

015-Atmik Smruti evam Atmik Dristi-23-11-01

Dadi Gulzar Ji
43:03146
015-Atmik Smruti evam Atmik Dristi-23-11-01
Spiritual Classes
015-Atmik Smruti evam Atmik Dristi-23-11-01
Dadi Gulzar Ji
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Essence

ओम शांति — यह कितना मीठा शब्द है, कितना पवित्र मंत्र है। कहते ही हलचल बंद हो जाती है और एकाग्रता आ जाती है।

भगवान की नज़र हम विशेष आत्माओ पर हैं। अपने जीवन को देखकर और बाबा के कर्तव्य को देखकर बाबा को भूलना बहुत मुश्किल है। बाबा कौन है और बाबा से जो प्राप्तियाँ मिलती हैं, यह स्वप्न में भी नहीं था। भगवान के इतने पास आ गए हैं, भगवान के सिर का ताज बन गए हैं, दिलतख्त पर बिठा दिया है — तो याद करना मुश्किल नहीं कह सकते। 

कितना भिन्न-भिन्न ‘मेरा-मेरा’ कहकर हम परेशान हो जाते है। इससे अच्छा एक ही बात कहो — “मेरा बाबा” — उसमें सब कुछ आ जाता है। याद उसकी आती है जिससे दिल का प्यार होता है। हमारा तो बाबा से दिल का प्यार है, तो वह भूलेगा कैसे? दिलाराम को दिल कैसे भूल सकते है?

कभी यह नहीं सोचना है कि बातें क्यों आती हैं। बातें तो आएँगी ही। हमें अपने आप को बचाना है। कलियुग माना ही कलह-क्लेश है — इसे आप टाल नहीं सकते, लेकिन स्वयं को बचा सकते हो। 
साधन है बाबा की याद। सिवाय बाबा के कोई गति नहीं है। बाबा की याद के बिना हम किसी भी बात को समाप्त नहीं कर सकते।

पेपर आएँगे, लेकिन हमारा काम है पास होकर दिखाना। और पास होने का बहुत सहज साधन है — कोई भी बात आए तो दिल से कहो: “बाबा, आप मेरे साथ हो, मेरे साथी हो, बाबा, आप मेरे कम्पैनियन हो, मेरी कंपनी हो, मेरे सब कुछ हो।”

माया को पैदा करने वाले हम स्वयं हैं। बाबा कहते हैं — मन में कमजोरी क्यों है? कोई न कोई शक्ति की कमी है। उस शक्ति को भर लो, फिर माया का सवाल ही नहीं रहेगा।
यह सदा याद रखो कि मैं अकेली नहीं हूँ। अकेले समझने से माया आती है, तो सदा याद रहे, बाबा साथ है — हम कंबाइंड हैं।

बाबा कहते हैं — मैं कितना ऑफर करता हूँ बच्चों को — मुझे साथी बनाकर यूज़ करो, काम में लगाओ। जब आवश्यकता हो उस समय मुझसे काम लो। लेकिन लेते नहीं हैं, फिर चिल्लाते हैं — की हमे छुड़ाओ। 

कोई भी व्यर्थ संकल्प चलता है तो उसमें पहला प्रश्न यही आता है — “यह क्यों हुआ?” और “क्यों?” से ही व्यर्थ संकल्पों की शुरुआत हो जाती है। मम्मा कहती थीं — “के, के, के” — यह कौवों की भाषा है। यह क्यों-क्या खत्म करो; तब न आप दुख लेंगे, न परेशान होंगे। 

ब्रह्माकुमार-ब्रह्माकुमारी बने हैं तो ब्रह्मा बाबा हमारा बाप है, शिव बाबा हमारा बाप है — याद क्यों नहीं आएगा? और कौन याद आएगा? इसलिए ‘योग’ शब्द को मुश्किल मत समझो। बाबा की प्राप्तियों को याद करो, बाबा के महावाक्यों को याद करो। अगर कोई और बिंदु सामने नहीं आता या बिंदु पर अधिक समय नहीं रुकता, तो ब्रह्मा बाबा में शिव बाबा को देखो — भृकुटि के बीच में देखो कि शिव बाबा मुझे ब्रह्मा बाबा के माध्यम से मिल रहे है।

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