

आज के क्लास में दादी जी ने तीन बिंदुओं को कवर किया है: गोपी के चित्त इतने बाबा के प्यार में मस्त होते हैं कि उन्हें दुनिया की सुध-बुध नहीं रहती। उन्हें याद करने का पुरुषार्थ नहीं करना पड़ता; याद स्वयं उन्हें बहुत सताती है। वे ईश्वर, परमात्मा, भगवान, साजन — सभी को अपने प्रेम की रस्सी में बाँधकर रखती हैं, जिसके कारण भगवान उनके पीछे-पीछे घूमते रहते हैं। गोपी को कभी दुख के आँसू नहीं आते; उनकी आँखें सदा बाबा के प्यार में गीली रहती हैं। आत्मा भीतर ही भीतर झूमती रहती है। जिसको मीरा जैसी मस्ती चढ़ी हो, उसे क्या मोह, क्या लोभ! विस्तार से सार: बाबा ने कहा है — तुम बच्चे सार में ज्ञान सुनाओ; विस्तार में बाद में सुनाओ। पाँच मिनट में सुनाओ, पर सार सुनाओ। लोग सार के प्यासे हैं, बूँद के प्यासे हैं। इस बार टेक्सास में सिमोन भाई ने टॉपिक दिया — “बाबा को प्यार कैसे करते हैं।” एक घंटा लोग सुनते रहे, आँखों से आँसू बहाते रहे। वायुमंडल को हल्का और स्नेहयुक्त रखना एक कला है। जो बाहर से आते हैं, उन्हें लगता है — यहाँ तो दिन-रात भगवान की बातें होती रहती हैं। परमात्मा के हाथों में हमारे हाथ हैं। भगवान को प्यार कैसे किया जाए? पहले हर एक यह अच्छे से समझ ले कि जीते जी प्यार से आखिर मिलता क्या है? वास्तव में आजकल छोटे बच्चों को माता-पिता का भी प्यार नहीं मिलता। आजकल 80% लोग शादी नहीं करना चाहते क्योंकि जीते जी रिश्तों में कुछ रहा ही नहीं। और एक है — धन से प्यार, संबंधों से प्यार, अपने शरीर से प्यार — ये तीनों ही धोखा दे रहे हैं। जब लोग परमात्मा के प्यार के बारे में सुनते हैं, तो उन्हें लगता है — हाँ, मानव के प्यार का एक alternative है। हर आत्मा अपने परिवार में यह अनुभव करती है — “ये मेरे माता-पिता हैं, मेरा परिवार है।” There is no pure love as God’s love. हर दुनिया की आत्मा के लिए बाबा हैं। हर आत्मा कहेगी — “बाबा मेरे लिए personally आए हैं।” धन्यवाद भगवान का, जो इतनी नरक जैसी दुनिया से बचाकर हमें पुण्य आत्मा बना रहे हैं।