

इस विशेष माह में हम अपनी मीठी दादी प्रकाशमणी जी को स्मृति में रखते हुए, उनके मुखारविंद से उच्चारी गई यज्ञ-हिस्ट्री साझा कर रहे हैं। 1936, हैदराबाद सिंध से आरम्भ हुई यह दिव्य गाथा स्वयं दादी जी की वाणी से सुनना एक अद्भुत अनुभव है। मुख्य झलकियां: सिंध, हैदराबाद की पृष्ठभूमि ओम मंडली में सत्संग की शुरूआत सत्संग का वातावरण और अद्भुत दृश्य आत्मज्ञान और दादी की व्यक्तिगत यात्रा ओम मंडली की प्रगति और विस्तार बाबा का कश्मीर प्रवास और दादी का अनुभव ओम निवास की स्थापना – पहला बोर्डिंग स्कूल पवित्रता पर विरोध और पिकेटिंग की घटना तपती धूप में दृढ़ता और कलेक्टर का हस्तक्षेप महाभारत में वर्णित प्रसंग का साक्षात्कार साकार में