

कराची यज्ञ की ऐतिहासिक झलकियां (चैप्टर 2): 1938-39 इस विशेष माह में हम अपनी मीठी दादी प्रकाशमणी जी को स्मृति में रखते हुए, उनके मुखारविंद से उच्चारी गई यज्ञ-हिस्ट्री साझा कर रहे हैं। मुख्य झलकियां: अलौकिक चरित्रों का प्रभाव बृज इंद्रा दादी और मम्मा एवं दादा विश्वकिशोर जी की भूमिका दीदी, दादियों और अन्य महारथी आत्माओं के पत्र को दादी जी ने सभी को पढ़के सुनाए क्लास के दौरान ओम मंडली का स्वरूप ज्ञान की रिमझिम और निमित्त आत्माओं का सहयोग तत्पश्चात विरोध बाँधेली आत्माओं पर आए संकट और झूठे आरोप मम्मा का साहसी एवं शक्ति स्वरूप कोर्टरूम में बाबा की वाणी सुनने से कैसे विमुख किया गया… फिर भी सुनते थे, उसकी रोचक कहानी बाबा के कैसे इस्तेहार डलवाये अख़बार में (दादीजी का स्वयंवर एवं “ओम मंडली को रिचेस्ट इन द वर्ल्ड” जैसे रमणीक प्रसंग) कुंज भवन की स्थापना और यज्ञ विस्तार तपस्या के साथ सेवा और विश्व युद्ध की शुरुआत 1939