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04 Aavesh Se Mukt Sneh Se Yukt Jeevan
Spiritual Classes

04 Aavesh Se Mukt Sneh Se Yukt Jeevan

Dadi Janki Ji
53:08273
04 Aavesh Se Mukt Sneh Se Yukt Jeevan
Spiritual Classes
04 Aavesh Se Mukt Sneh Se Yukt Jeevan
Dadi Janki Ji
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Essence

इस क्लास में दादी ने सूक्ष्म आवेश पर ध्यान खींचा है

कभी-कभी आवेश जमा हुए विचारों से उत्पन्न होता है। जितनी अधिक सेवा और मेहनत करते हैं, यदि आवेश में आकर बोलते हैं, तो अपनी की हुई कमाई नष्ट कर देते हैं। जिनको आवेश आता है, उनके अंदर सच्चा प्रेम नहीं होता। यह इसलिए भी होता है क्योंकि उनमें सहनशक्ति कम होती है, हृदय कोमल होता है, अभी बचपन की स्थिति रहती है या ज्ञान की कमी होती है — इसलिए वे जल्दी आवेश में आ जाते हैं। हमें ऐसे कर्म नहीं करने चाहिए जिनसे दूसरे को गुस्सा आए। आवेश में आने से दिल खराब हो जाती हैं।

दूसरी बात – अभिमान: “में जो कहूं वही होना चाहिए।” जब यह भावना आती है, तब टकराव होता है। यदि किसी को देखकर लगे कि वह जानबूझकर सेवा से बच रहा है, तो उसे क्रोध से नहीं, बल्कि बहुत प्रेम से समझाना चाहिए। चाहे कोई भूल करे या अलबेलेपन में हो, हमें स्वयं गुस्सा नहीं करना चाहिए। यहाँ हम स्नेह से ट्रेनिंग दे सकते हैं।

पालना और काम में अंतर:
हम केवल हाथों से काम न करें, बल्कि दिल से पालना दें। केवल स्थूल कार्य करते-करते मन थक जाता है, जबकि सच्ची पालना प्रेम से होती है। हमें ध्यान रखना चाहिए कि क्लास का सम्मान और मूल्य पहले हमें स्वयं अनुभव हो, तभी दूसरों तक पहुँचेगा।

इतने अच्छे कर्म और व्यवहार होने चाहिए कि हमारे कार्य और चेहरे से शुद्धता झलके। हमारी हैंडलिंग में संपूर्ण प्रेम होना चाहिए — आवेश बिलकुल नहीं। क्लास के मामले में किसी को व्यक्तिगत रूप से क्लास नहीं देना चाहिए; यदि हम सभी को अलग-अलग क्लास देंगे तो वातावरण बिखर जाएगा। जितना हो सके, दूसरों को संक्षेप में और स्पष्ट रूप से समझाएँ।

जहाँ आवेश होगा, वहाँ कुछ न कुछ बिगड़ेगा। सुधारना हो तो स्नेह से करें। “करके सिखाना” और “आदेश देना” — दोनों में अंतर है। हमारी शुद्धि और वृद्धि देखकर ही अन्य लोग सीखते हैं। इसलिए जैसे हम बनना चाहते हैं, वैसे ही बनें और वैसा ही सिखाएँ।

स्नेह में कभी थकावट नहीं होती। स्पष्ट रहने से श्रेष्ठता बनी रहती है।
मिसअंडरस्टैंडिंग, कन्फ्यूजन और निर्णयशक्ति की कमी ज्ञानी आत्मा के पुरुषार्थ में बाधा डालते हैं।
अनुमान लगाना भी एक बड़ा खतरा है।

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