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निश्चय बुद्धि एक बल एक भरोसा
Spiritual Classes

निश्चय बुद्धि एक बल एक भरोसा

Dadi Gulzar Ji
53:16128
निश्चय बुद्धि एक बल एक भरोसा
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निश्चय बुद्धि एक बल एक भरोसा
Dadi Gulzar Ji
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Essence

अमृतवेले अपने प्यारे बाबा से मिलन मनाया, तो मधुबन में पावरफुल योग का अनुभव अवश्य हुआ होगा। पावरफुल योग ही विघ्न विनाशक बनने का साधन है। पहले अपने मन के विघ्नों को समाप्त करना होगा, तभी निर्विघ्न बन सकते हैं। विघ्न आएँगे ही—उनका काम है सामने आना और हमारा काम है विघ्न विनाशक बनना।

बीती हुई बातों के बारे में बार-बार सोचना, पानी को बिलोने जैसा है। इससे समय, संकल्प और ऊर्जा व्यर्थ होती है। जो बिंदी रूप में स्थित रहता है, वही बीती बातों पर बिंदी लगा सकता है। इसलिए तीन बिंदियाँ याद रखें—मैं बिंदी, बाबा बिंदी और जो बीत गया सो बिंदी।

सभी को बापसमान बनना है, इसलिए बाबा बिंदी हैं—यह स्मृति सदा रहे। यदि आत्मस्थिति में नहीं हैं और केवल "बाबा, बाबा" कहते हैं, तो शक्ति का अनुभव नहीं होगा। आत्मा बनकर याद करेंगे, तभी परमात्मा की मदद मिलेगी। देह-अभिमान ही अधिकांश विघ्नों का कारण है। पहला पाठ निश्चय का है; निश्चय नहीं, तो विजय भी नहीं। व्यर्थ संकल्प भी संशय का बीज है।

हमारा एकमात्र आधार बाबा हों। किसी व्यक्ति की विशेषता को आधार न बनाएँ; वह भी प्रभु-प्रसाद है। परिवार के साथ प्रेम और सम्मान रखें, उनकी विशेषताओं को अपनाएँ, लेकिन आधार केवल एक बाबा को बनाएँ।

बाबा से गहरा और सच्चा संबंध रखें। उनसे दिल की बात करें। मेरा बाबा मुझे सुनता है, प्यार करता है और मार्गदर्शन देता है—ऐसा अनुभव हो। जब याद में मिलावट होती है, तब अनुभव कम हो जाता है। इसलिए एक बल, एक भरोसा—सिर्फ बाबा।

यदि कोई बात या शिकायत रखनी हो, तो शुभ वृत्ति और शांत भाव से रखें, आवेश या शिकायत की वृत्ति से नहीं। शुभ भावना समाधान लाती है। बाबा ने सिखाया है—गाली देने वाले के प्रति भी शुभ भावना रखो। इसलिए व्यक्ति नहीं, परिस्थिति को समझो।

महारथी भी कभी-कभी परवश हो सकते हैं। इसलिए किसी की कमजोरी देखकर व्यर्थ संकल्प न करें। परिवार आवश्यक है, लेकिन आधार नहीं। सेंटर पेपर हॉल है, इसलिए पेपर आएँगे ही। बिना पेपर के पास भी नहीं हो सकते।

बाबा से इतना जिगरी प्यार हो कि हर संबंध—पिता, सखा और शिक्षक—का अनुभव उन्हीं से हो। "बाबा मेरा है" इस निश्चय से योग सहज और पावरफुल बनता है। बाबा की याद फरियाद से नहीं, मेरेपन से करें। जब "मेरा बाबा" का अधिकार अनुभव होगा, तब मुरली का आनंद भी बढ़ेगा और जीवन में सच्ची खुशी आएगी।

अपने शरीर, व्यक्तियों या वैभव में भी मेरा-पन न लाएँ। सुख और शांति केवल बाबा से मिलती है। इसलिए सदा याद रखें—एक बल, एक भरोसा। हमेशा बुद्धि की एक अंगुली ऊपर, बाबा की ओर रहे।

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