

हमारा सबसे बड़ा खजाना है — संकल्पों का खजाना। योग का आधार संकल्प शक्ति है। मन ही संकल्प शक्ति है। ज्ञान का मनन भी तब होगा जब मन साफ़ होगा। ज्ञान को हम मनन शक्ति से ही अपना बनाते हैं। ज्ञान का बीज भी मनन शक्ति से ही अंकुरित होता है। योग, ज्ञान, धारणा और सेवा — इन चारों सब्जेक्ट्स का आधार है संकल्प शक्ति। समय भी एक खजाना है। समय तभी ठीक होगा जब मन ठीक होगा। मन ठीक होगा तो बुद्धि सही निर्णय ले पाएगी। बाबा कहते हैं शुभ भावना, शुभ कामना रखो, तो यह मन में ही रखेंगे। समय कभी व्यर्थ नहीं करना है। अमृतवेला को बाबा विशेष महत्व इसलिए देते हैं क्योंकि उसी समय पूरी दुनिया के ब्राह्मण एक साथ योग करते हैं। ऐसा और कोई समय नहीं होता जब पूरा संगठन एक साथ योग करता हो। अमृतवेला में लाखों भाई-बहन संगठन में योग करते हैं, इसलिए वायुमंडल का सहयोग बहुत अच्छा होता है। चारों ओर से सकाश मिलता है और बाबा भी उस समय चक्कर लगाते हैं, क्योंकि बाबा का अटेंशन अपने बच्चों पर होता है। श्वास भी एक खज़ाना है — इसलिए वह व्यर्थ न जाए। दिमाग की एनर्जी भी खजाना है। दिमाग की एनर्जी अगर वेस्ट की तो उसका असर शरीर पर होता हैं। जो ज्यादा बोलते हैं या ज्यादा सोचते हैं, उनकी दिमाग की ऊर्जा कमजोर हो जाती है। छोटी-सी बात के वजह से योग नहीं लगेगा, मूड ऑफ हो जाएगा और नींद आ जाएगी। इसलिए बड़ी बात को छोटी करना सीखो, नहीं तो ब्राह्मण जीवन का सुख नहीं मिलेगा। जरा भी व्यर्थ बात बुद्धि में टच नहीं होनी चाहिए। शक्तियाँ और गुण भी खजाना हैं। बाबा ने शक्तियाँ दी हैं विकारों पर जीत पाने के लिए। जो भी शक्ति है, उसे समय पर उपयोग में लाओ। क्रोध या किसी भी विकार में दिमाग की एनर्जी, समय और शक्ति व्यर्थ न जाए। शक्तियों को समय पर यूज़ करो। अगर बाद में याद आए कि सहन कर लिया होता तो अच्छा होता, तो समझो हमारी सहन शक्ति व्यर्थ चली गई। गुणों का भी समय पर उपयोग जरूरी है। जैसे — अंतर्मुखी होना। अगर कोई बात चल रही है और उसका मुझसे कोई संबंध नहीं है, तो उस समय अंतर्मुखी हो जाओ, बजाय उस बात को सुनने के। अगर अंतर्मुखी नहीं हुए, तो कोई शब्द कान में पड़ेगा, व्यर्थ संकल्प चलेंगे और अंतर्मुखी होने का गुण व्यर्थ चला जाएगा। यही समय है, जिसकी प्रालब्ध 21 जन्म चलेगी। इसलिए अपना चार्ट लिखो। अगर रात को नहीं लिखा, तो सुबह उठकर लिखो — लेकिन लिखो जरूर। चेक करना बहुत जरूरी है। अगर समझो 1 घंटा बचाया, तो उमंग आएगा कि 1 से फिर डेढ़ घंटा बचाऊँ। ऐसे ही बचत का खाता बढ़ेगा। रीस नहीं करो, रेस करो। बाबा के प्यार में झूलो, बाबा के तख्त पर झूलो। अगर दिलशिकस्त रहेंगे तो यह सब कब करेंगे? मज़ा तो इसमें है। विनाश के समय अगर व्यर्थ चला तो क्या फायदा? याद रहे, बाबा हर घड़ी मेरा साथी है। बाबा पर हमारा अधिकार है। गहरे अनुभव करो, दिल से अधिकारपूर्वक बोलो।