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एक वृता कैसे बने — एक बाबा दूसरा ना कोई
Spiritual Classes

एक वृता कैसे बने — एक बाबा दूसरा ना कोई

Dadi Gulzar Ji
45:13118
एक वृता कैसे बने — एक बाबा दूसरा ना कोई
Spiritual Classes
एक वृता कैसे बने — एक बाबा दूसरा ना कोई
Dadi Gulzar Ji
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Essence

एक बाबा ही सब कुछ हैं। दुनिया में हमारी बुद्धि संबंधों, प्राप्तियों और सुंदरता की ओर जाती है। माँ, पिता, भाई, बहन, दोस्त — सब अलग-अलग संबंध हैं, लेकिन यहाँ हमारे सर्व संबंध एक बाबा से ही हैं। भक्ति में भी कहते हैं — "तुम ही हो माता, पिता, बंधु, सखा — सब तुम ही हो।" जैसे सुपरमार्केट में सब कुछ एक ही जगह मिल जाता है, वैसे ही यहाँ सर्व संबंध और सर्व प्राप्तियाँ हमें बाबा से ही मिलती हैं।

दुनिया में कोई हमें शांति देता है, कोई प्रेम या आनंद देता है, लेकिन बाबा हमें सर्व प्राप्तियों का अनुभव कराते हैं। "मनमनाभव" — मन को बाबा में लगाओ।

मम्मा ने कहा — आगे बढ़ने और ऊँची स्थिति बनाने के लिए हमेशा अच्छी रीति से चलने वाली, ऊँची अवस्था वाली आत्माओं को देखो, कमजोर आत्माओं को नहीं। अपनी जजमेंट स्वयं करो।

हम सोचते हैं — बाबा को याद भी करेंगे, सेवा भी करेंगे, लेकिन सरेंडर नहीं होंगे। सरेंडर होना अर्थात मरजीवा बनना, नया जन्म लेना। पूरा दिन बाबा और सेवा में रहना ही सच्चा सरेंडर है। गृहस्थ में रहते हुए हमें परिवार और सेवा — दोनों में संतुलन रखना होता है।

हर एक की विशेषता देखो। जो हमसे आगे हैं, उनसे सीखो। बाबा से प्यार रखो और जो बाबा कहते हैं, वही करो। तकलीफ में भी बुद्धि केवल बाबा में रहे।

"फॉलो फादर" करना है, "फॉलो ब्रदर या सिस्टर" नहीं। धारणा करनी है तो मम्मा-बाबा को देखो। ब्राह्मणों में उनकी विशेषता देखो, कमजोरी नहीं। कमजोर आत्माएँ भी पुरुषार्थ करने आई हैं, इसलिए उनकी कमजोरी धारण नहीं करनी है।

एक बाबा से ही हमारा संबंध है। 21 जन्मों की सर्व प्राप्तियाँ बाबा से हैं। बाबा सत्यम, शिवम्, सुंदरम् हैं। उनकी प्राप्तियाँ कोई छीन नहीं सकता। यदि बाबा की अनुभूति नहीं होती, तो समझो बुद्धि कहीं और लगी है — संबंधों में, खाने-पीने में या देखने-सुनने में। इसलिए स्वयं को चेक करो।

मन चंचल है, इसलिए उसे एकाग्र और अंतर्मुखी बनाना है। मन को "रियल गोल्ड" बनाओ, ताकि जहाँ चाहो वहाँ लगा सको। बाबा ने मन को चार अवस्थाओं में रखने की दिशा दी है— बीजरूप अवस्था, फरिश्ता स्वरूप, बाबा से रूह-रुहान, ज्ञान का मनन इनके बाहर जाकर व्यर्थ नहीं सोचना है।

यदि बाबा में मेरापन है, तो बाबा कभी नहीं भूलते। अनुभव रहे — "बाबा मेरे लिए ही आया है।" बाबा के प्यार में लवलीन रहो। बाबा में निश्चय होगा, तो नशा रहेगा और मेहनत महसूस नहीं होगी। मन खुशी में नाचता रहेगा। टेंशन और अटेंशन — दोनों मन की बात हैं। यह हमारे हाथ में है कि हमें क्या रखना है।

बाबा ही हमारा संसार हैं — मैं बाबा की हूँ और बाबा मेरे हैं।

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