बापदादा ने इस सीजन में तपस्या वर्ष के लिए विशेष संदेश दिया कि योगी तो बच्चे हैं ही, अब प्रयोगी बनना है। बाबा की याद से योगी बन जाए तो भोगी जीवन समाप्त हो जाता है।
अब योग की शक्तियों को जीवन में प्रयोग करना है।
जैसे साइंस को लोग तब मानते हैं जब प्रयोग करके दिखाया जाता है, वैसे ही साइलेंस की शक्ति का भी अनुभव और प्रयोग करना और कराना है। योग से सुख, शांति, आनंद, प्रेम, हिम्मत और उमंग मिलती है, लेकिन अब इन गुणों की डीपनेस में जाकर उन्हें व्यवहार में लाना है।
अष्ट शक्तियाँ मिली हैं, अब समय पर उन्हें शस्त्र की तरह उपयोग करना है। कोई अपमान करे तो प्रेम के सागर में स्थित रहना, कोई परिस्थिति आए तो सहन और समाने की शक्ति को आव्हान करना — यही प्रयोग है।
हर गुण के साथ स्मृति, गुण, शक्ति और ज्ञान की पॉइंट जोड़कर अभ्यास करना है। जैसे, मैं बेफिक्र बादशाह हूँ, ड्रामा कल्याणकारी है, मेरा पार्ट श्रेष्ठ है — ऐसी स्मृति से आनंद स्वरूप बन सकते हैं।
अनुभव की ऑथोरिटी बनना है, तभी दूसरों को अनुभव करा सकेंगे। चलते-फिरते, ट्रैफिक कंट्रोल में भी एक सेकंड में स्थिति बदलने का अभ्यास करना है।
हमारी वृत्ति से वायुमंडल बनता है। जैसे मधुबन में सबकी वृत्ति बाबा में है इसलिए सहज योग लगता है, वैसे ही हमें अपने पावरफुल संकल्प से प्रकृति और आत्माओं को बदलना है।
बहुत बड़ा कार्य है — पुरानी दुनिया बदलकर नई दुनिया बनानी है। इसके लिए अंतर्मुखी बनकर भृकुटी कुटिया में स्थित होने का अभ्यास करना है। फाइनल पेपर में चारों ओर हलचल होगी, तब एक सेकंड में स्मृति लानी है।
