

हमारा सबसे बड़ा भाग्य क्या है? परमात्मा बाप, टीचर और सद्गुरु — सर्व संबंध से परमात्मा हमारे हो गए। ऐसा भाग्य सतयुग के देवताओं का भी नहीं, जो हमें ब्राह्मण जीवन में मिला है। इसलिए सदा दो बातें याद रखें— बाबा हमें क्या से क्या बना रहे है। बाबा ने हमें क्या-क्या प्राप्तियाँ कराईं। यदि कोई पूछे कि शिव बाबा ने क्या दिया, तो संक्षेप में कह सकते हैं— अप्राप्त कुछ भी नहीं, सर्व प्राप्तियाँ हो गईं। कभी-कभी माया के कारण हम दिलशिकस्त हो जाते हैं। पर परमात्मा के बच्चे होकर हमें कभी निराश नहीं होना है। जब भी कमजोरी लगे, अपनी प्राप्तियों को सामने लाओ। बाबा कहते हैं— तुम अकेले नहीं हो, कंबाइंड हो। सर्वशक्तिमान की सर्व शक्तियाँ हमारे साथ हैं। हम मास्टर सर्वशक्तिमान हैं, इसलिए दिल बड़ा रखें और सदा खिले हुए गुलाब बनकर रहें। शक्तियों को सिर्फ जानना नहीं, समय पर उपयोग भी करना है— जैसे सहनशक्ति, निर्णय शक्ति, परखने की शक्ति। सहनशक्ति ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार है। कोई कुछ कहे तो ज्यादा मनन में न जाएँ, फुल-स्टॉप लगा दें। सहन करने से बाप की दुआएँ मिलती हैं और हार में भी विजय होती है। सभी आत्माओं के प्रति शुभ भावना रखें। यदि कोई देह-अभिमान या क्रोध के वश है, तो रहम भाव रखें और शुभ भावना से उसे मुक्त करें। शक्तियों की पहले से प्रैक्टिस करेंगे तो समय पर सहज स्मृति आएगी। जहाँ कमजोरी होगी, वहीं से माया आएगी। इसलिए हर शक्ति को इमर्ज करें, अभ्यास करें। हम शक्तिवान ही नहीं, मास्टर सर्वशक्तिमान हैं। जब परमात्मा कंबाइंड है, तो दिलशिकस्त क्यों हों? सदा खुश रहें।