

बाबा की याद में हम रहने का पुरुषार्थ करते है, लेकिन माया भी अपना काम नहीं छोड़ती। खाली दिमाग देखकर वह आ जाती है। इसलिए बाबा कहते हैं—सिर्फ याद नहीं, कंबाइंड रहो। कंबाइंड रहने से कोई हमें बाबा से अलग नहीं कर सकता। पुराने विस्मृति के संस्कार कभी-कभी खींच लेते हैं, लेकिन बाबा रहमदिल है। अगर हमसे गलती हो जाए और हम सच बोल दें, तो बाबा प्यार से कहते हैं—“बच्ची, पास्ट इज पास्ट ।” और आगे बढ़ने की शक्ति देते हैं। इसलिए दृढ़ संकल्प रखो— “हमें बाप समान जरूर बनना है।” बाबा कहते हैं—मन का काम सोचना है। अगर उसे खाली छोड़ दिया, तो वह और कुछ सोचने लगेगा। इसलिए मन को बाबा की याद में लगाओ। स्मृति में रखो—तीन बिंदी का तिलक: बाबा – आत्मा – ड्रामा । सिर्फ बोलना नहीं, स्मृति स्वरूप बनना है। संकल्प, बोल और कर्म एक होने चाहिए, क्योंकि जो करेगा वही पाएगा। मास्टर सर्वशक्तिमान का टाइटल बहुत बड़ा है, इसलिए पेपर भी बड़े आएंगे । माया से घबराना नहीं, क्योंकि बाबा हमारा साथ कभी नहीं छोड़ता। बाबा कहते हैं—खजानों से अपनी झोली भरकर जाना है। सदा खुश रहो और यह स्लोगन याद रखो— “जो कल बीत गया अच्छा था, जो आज है अच्छा है, और जो कल होगा वह बहुत अच्छा होगा।” अब याद और सेवा का डबल लॉक लगाकर सदा एवररेडी रहना है और अपने परिवर्तन से बाबा को रिटर्न देना है।