

निःस्वार्थ सेवाधारी बच्चों प्रति जानकी दादीजी का क्लास: सेवाधारी बच्चे जो इच्छा मात्रम् अविद्या में पास होते है, वही पास विद ऑनर्स बन सकते है। बाबा की नज़र सदा उन बच्चों पर रहती है, जो निःस्वार्थ सेवाधारी बनते हैं। जिनके मन में हो, मरना तेरी गली में, जीना तेरे गले में। दादीजी समझाते है की, हर सेकंड स्वः की उन्नति हो, या मुझ आत्मा द्वारा दूसरों की उन्नति हो— यही सच्ची चढ़ती कला है। इस क्लास द्वारा, एक श्रेष्ट सेवाधारी के लक्षण सुने और अपने को चेक करे, क्या में बाबा का सच्चा सेवाधारी हूँ? और, दादी जी द्वारा उनके ब्रह्मा बाबा के संग के अनुभव भी सुने।