

बाबा का वरदान है—जहाँ सेंटर में माताएँ होती हैं, वहाँ भंडारा और भंडारी दोनों भरपूर रहते हैं। माताओं की सच्ची भावना का फल उन्हें अवश्य मिलता है। जो नाम के लिए सेवा करते हैं, भावना से नहीं, उन्हें सफलता नहीं मिलती। परमात्मा मार्ग में सच्चे दिल से सेवा करने वालों को ही सफलता मिलती है। बाबा एक का पदमगुणा देते हैं और 21 जन्म की गारंटी भी देते हैं। यज्ञ के लिए जो संकल्प किया है, उसे पूरा करना चाहिए। संकल्प किया मतलब वह बाबा की अमानत हो गई। संकल्प करके पूरा नहीं किया तो नुकसान हो जाता है। सफल करना केवल धन से नहीं—तन, मन और धन तीनों से करना है। शरीर से जितनी सेवा हो सके वह करनी है। ब्रह्मा बाबा को दधीचि ऋषि कहा जाता है, जिन्होंने अपनी हड्डी तक यज्ञ में स्वाहा कर दी। मनसा, वाचा, कर्मणा—तीनों से सेवा करनी है। सफल करो तो सफलता पाओ। हम बच्चों को योगबल और मनोबल द्वारा विश्व की आत्माओं को सुख-शांति की अंचली देनी है। आज आत्माएँ निर्बल, भयभीत और परेशान हैं, इसलिए ज्ञान अच्छा लगता है पर धारण कठिन लगता है। ऐसी आत्माओं को रूहानी बल देने वाले हम बच्चे निमित्त हैं। इसलिए सेवा में बिज़ी रहो। हम दाता के बच्चे, मास्टर दाता हैं—स्वस्थ, निर्विघ्न और सहज। बापदादा का माताओं पर दिल का और रहम का प्यार है। जिन्हें दुनिया ने नीचे गिराया, बाबा ने उन्हें ऊपर उठाया और शिव शक्ति बना दिया। यह विश्व की एकमात्र आध्यात्मिक संस्था है जहाँ नारी आगे है। माताएँ बाबा के दिल-तख़्तनशीन हैं। बापदादा माताओं को वतन में इमर्ज कर रूहानी मसाज देते हैं, क्योंकि वे थकी हुई हैं। सदा बाबा के साथ कंबाइंड रहो—तो कोई अलग नहीं कर सकता। बाबा बच्चों को मेहनत करते हुए नहीं, मेहनत-मुक्त देखना चाहते हैं। बाबा के साथ रहना है और साथ चलना है — यही याद रहे।