

ज्वाला भस्म भी करती है और परिवर्तन भी लाती है। जैसे अग्नि कीचड़े को भस्म कर कच्चे को पक्का बनाती है, वैसे ही ज्वालामुखी योग से सच्चा परिवर्तन होता है। ब्राह्मण बनने के बाद छोटा-सा पाप भी बड़ा हो जाता है, क्योंकि हर कदम में पद्मों की कमाई होती है। निंदा, ग्लानि, अपशब्द या गलत दृष्टि—ये सभी सूक्ष्म पाप हैं। दृष्टि बदलने से सृष्टि बदल जाती है। बाबा की बनाई दिनचर्या—अमृतवेला, मुरली—को बहाना बनाकर छोड़ना भी श्रीमत का उल्लंघन है। सभी पुरुषार्थी हैं, इसलिए भूल हो सकती है, और इसी कारण बाबा ने “फॉलो फादर” कहा है। माला दाने-दाने से बनती है, इसलिए ब्रदर-सिस्टर को शुभ भावना और कामना से देखना ही श्रीमत है। इन उल्लंघनों से छोटे-छोटे पाप बनते हैं, जो मन की स्थिति पर असर डालते हैं और उदासी बढ़ाते हैं। ज्वालामुखी योग से पाप कटते हैं और दूसरों की सेवा भी होती है। हमारी दृष्टि और वृत्ति अनेक आत्माओं की भलाई में लग सकती हैं। बाबा ने इसके लिए चार स्टेज और चार लकीरें दी हैं, जिनके बाहर नहीं जाना है। चार स्टेज हैं: (1) बीजरूप (बहुत पावरफुल), (2) फरिश्ता रूप, (3) ज्ञान का मनन (मुरली याद कर व्यर्थ बातें समाप्त करना), (4) बाबा से रूह रिहान (आत्मा को शुद्ध करना)। पहले स्टेज की शक्ति बहुत बड़ी है, लेकिन दूसरी तीन स्टेज से व्यर्थ खत्म होता है और योग की प्रगति बढ़ती है। इस योग में सभी शक्तियाँ एकत्रित हो जाती हैं। जैसे बीज में पूरे वृक्ष का सार होता है और उचित धूप-पानी मिलने पर पत्ते उगते हैं, वैसे ही ज्वालामुखी योग में सर्व शक्तियाँ मर्ज होती हैं। इसके लिए सहन शक्ति, संकल्प, समय, दिमाग की ऊर्जा और शक्ति का सही स्टॉक होना ज़रूरी है। व्यर्थ को तुरंत रोकना आना चाहिए। अपना ही पावरफुल जज बनो, दूसरों का नहीं। किसी के दोष पर ध्यान देने या व्यर्थ सोचने से पाप बढ़ता है। अगर कुछ गलत लगे और शुभ भावना हो, तो उचित टीचर को चिट्ठी देकर मार्गदर्शन लेना चाहिए। छोटे-छोटे बोझ लगातार जुड़ते रहें तो ज्वालामुखी योग संभव नहीं। तूफान में हल्की चीज़ उड़ जाती है, भारी चीज़ नहीं। यही बोझ हमें उन्नत स्थिति तक नहीं जाने देता। इसलिए ज्वालामुखी योग के लिए शक्ति का स्टॉक जमा करना और व्यर्थ रोकने का अभ्यास करना ज़रूरी है। इस अवस्था में सर्व शक्तियाँ मर्ज होती हैं, जिससे योग बेहद पावरफुल बनता है। लास्ट समय में स्वयं की शक्तिशाली ज्वालामुखी स्टेज होगी, तो ही विश्व कल्याण संभव होगा। वाइब्रेशंस फैलाकर वायुमंडल बदलना और प्रकृति तथा आत्माओं पर सकारात्मक प्रभाव डालना ही वास्तविक सेवा है। दादी और बाबा को रिटर्न देना है, इसके लिए दो शब्द याद रखो: स्टॉक और स्टॉप—इन्हें प्रैक्टिकल में लागू करना जरूरी है। शक्तियाँ मिली हैं तो कमजोरियाँ मिटाओ और योग लगाकर मायाजीत बनो। बाबा ने दिन में १० बार चांस दिया है—५ बार ट्रैफिक कंट्रोल और ५ बार मुरली याद करके। इसे नियमपूर्वक पालन करने से याद में निरंतरता आती है और बाबा की दुआएं मिलती रहेगी। साधारण संकल्प को पावरफुल संकल्प में बदलो, मन और बुद्धि को व्यस्त रखो और ज्वालामुखी बनकर विश्व की सेवा करो।