

1) नष्टो मोह में प्रथम नंबर कभी भी लोकिक घर को याद नहीं करना है। अपने अंदर बाबा की याद और प्यार इतना समा जाए कि लोकिक वाले आपको याद न करें, और आप भी उन्हें याद न करें। माँ की ममता बहुत प्रबल होती है, परन्तु यदि पढ़ाई में ऊँचा नंबर पाना है, तो नष्टो मोह बनने-बनाने में नंबर वन बनना आवश्यक है। यदि अंत तक लोकिक घर की याद आती रहे, तो चंद्रवंशी कुल में आना भी कठिन हो जाएगा। अंदर से सबके लिए शुभ भावना हो। जो दवा और दुआ बाबा के घर पर मिलती है, वह लोकिक घर से नहीं मिल सकती। शरीर को कुछ होता है तो बाबा को याद करो। बाबा साकार में जैसी पालन देते थे, वैसे ही पालन देने के लिए बंधे हुए हैं — वे हमारी माँ हैं। छोटी बीमारी हो तो उसे बड़ी न बनाओ, और बड़ी हो तो उसे कुछ न समझो — तब किसी की याद नहीं आएगी (सिवाय बाबा के)। एक ने कहा, दूसरे ने माना — शिव बाबा कहते हैं, वही सच्चा ज्ञानी है। नम्रता के साथ सहनशीलता भी हो, धैर्यता भी हो, और ईश्वरीय स्नेह भी हो। हमेशा यह सोचो — “मैं बाबा की हूँ”, तो अपने आप रिश्तों में रूहानियत आ जाएगी। Work when you work; play when you play. 2) योग दान हमें योगयुक्त रहना है और शुभ चिंतक बनना है। यदि कोई अपकारी भी हो, तो उसे उपकारी दृष्टि से देखना है — यही गुप्त दान है। यह हमारी नेचुरल सेवा होती रहे। छोटी-छोटी बातों में जो अभिमान का घेरा होता है, उसे बचपन से ही समाप्त करना है। यदि कोई आत्मा फ्री हो, तो उसे देखकर दूसरे भी फ्री हो जाएँ। सूर्य का काम है प्रकाश देना, और चंद्रमा का काम है शीतलता देना। हम भी अपने माता-पिता समान — मास्टर सूर्य और मास्टर चंद्र हैं; हम शीतलता भी देते हैं और प्रकाश भी। 3) कर्मणा भाव, क्षमा भाव, और अनुशासन (Discipline) सिखाना किसी से भूल हो जाए, तो हमारी बुद्धि इतनी श्रेष्ठ हो कि हमारे अंदर क्षमा भाव उत्पन्न हो। अगर मुझसे कोई भूल हो जाए और भगवान मुझे क्षमा करें — तो मुझे कितनी खुशी होगी! यह भाव हो कि जो मिलता है, उसमें मैं संतुष्ट हूँ — इसलिए कोई आसक्ति नहीं है। एक ओर क्षमा भाव, दूसरी ओर करुणा, मदद और सहयोग — यही सच्चा कर्मणा भाव है। 4) भावुकता को कैसे खत्म करें भावनाएँ होनी चाहिएं, परंतु अत्यधिक भावना भी नहीं। ज्ञान और समझ के साथ अभिमान-रहित, शुद्ध और मीठी भावना रखनी चाहिए। हमेशा गुप्त खबरदार रहें कि हमारी शुभ भावना इतनी शक्तिशाली हो कि दूसरे की बुराई का हम पर कोई प्रभाव न पड़े। बाबा की याद और ज्ञान की शक्ति से अपने को ऐसा सुरक्षित रखना चाहिए कि किसी के अवगुण का मुझ पर प्रभाव न हो। यही है सच्ची भावना रखना।