

इस क्लास में प्यारी दादी जी ने “Nothing New” का लेसन पक्का कराया है और अपने पार्ट पर ध्यान खिचवाया है। ----------------------------------------------------- जो बाबा कहते हैं कि जीवन-मुक्ति तुम बच्चों का बर्थराइट है, वह जीवन-मुक्ति कहाँ अनुभव होती है? सतयुगी जीवन-मुक्ति और संगम-युगी जीवन-मुक्ति अलग हैं। संगम-युगी जीवन-मुक्ति की बहुत बड़ी खुशी है, और जीवन-मुक्ति सुख, शांति और संपन्नता का अनुभव करने में सहायक बनती है। बाबा की दृष्टि से निर्बल को बल मिलता है। जैसे सूर्य की साकाश हमें पावन बना देती है — करंट की तरह। अंतिम स्मृति हमारी ऐसी हो कि कोई भी याद न आए। याद आना मतलब किसी बंधन ने खींच लिया। ज्ञान ने हमें Nothing New की हर्षित भावना दी। परिस्थिति आए, प्रॉब्लम आए, पेपर या परीक्षा आए—कुछ भी हो—लेकिन हमारे पास उसकी थोड़ी-सी भी फीलिंग नहीं होनी चाहिए। बाबा हमें सिखाते हैं: तुम न्यारे होकर पार्ट बजाते हो तो प्यारे बन जाते हो। निर्लिप्त रहने के लिए यह आवश्यक है। हमें दूसरों के पार्ट में घुसने की आदत पड़ी हुई है; फिर जो अपना पार्ट बजाना चाहिए — न्यारा और प्यारा रहकर — वह छूट जाता है। फीलिंग किसी भी प्रकार की मिक्स्चर न हो।