

राजयोग यूनिवर्सिटी की डिग्री है – सर्वगुण सम्पन्न, 16 कला सम्पन्न, मर्यादा पुरुषोत्तम, सम्पूर्ण निर्विकारी, डबल अहिंसक। अगर इनमें से किसी की भी कमी है तो सम्पूर्ण नहीं कहा जाएगा। इसकी निशानी है तीर-कमान (त्रेता युग)। सम्पूर्ण की निशानी है मुरली – 16 कला सम्पन्न; त्रेता की निशानी है तीर-कमान – 14 कला सम्पन्न। अगर युद्ध करते-करते शरीर छोड़ा, या (गुण) प्रतिशत में है, तो निशानी है चंद्रवंशी। सम्पूर्णता की निशानी है मुरली – (बाबा की) मुरली सुनने वाले और सुनाने वाले दोनों खुशी में नाचते हैं, इसलिए निशानी मुरली दिखाते हैं। बाबा विशेष रूप से 16 कला सम्पन्न डिग्री के बारे में सुनाते हैं। सभी कलाएँ आ जाएँ तो सर्वगुण सम्पन्न भी बन जाते हैं, डबल अहिंसक और निर्विकारी भी बन जाते हैं। जैसा समय, जैसा संगठन और जैसा वातावरण हो, उसके अनुसार अपने को एडजस्ट करना – यह भी कला है। रमणीक वातावरण में रमणीक बनना (अपनी मर्यादा में रहते हुए, ज्ञानयुक्त रमणीक नेचर रखना)। रमणीकता और गंभीरता का बैलेंस, लव और लॉ का बैलेंस – इस बैलेंस को कार्य में लगाना भी कला है। दूसरी कला है – समय के अनुसार अपने को मोल्ड करना। जिस समय जो पाठ चल रहा हो, वैसे अपने को मोल्ड करें तो सफलता भी मिलेगी। “मेरी नेचर ऐसी है, मेरे संस्कार ऐसे हैं” – यह गलत है, क्योंकि हम ब्राह्मणों के संस्कार, स्वभाव और नेचर वही हैं जो बाबा के हैं। जहाँ बैलेंस से एकाग्रता होती है, वहाँ निर्णय शक्ति भी एक्यूरेट होती है। योग से बुद्धि एकाग्र होती है तो शक्ति मिलती है और सब कुछ स्पष्ट दिखाई देता है। जैसे सागर में उछाल हो तो कुछ दिखाई नहीं देता, लेकिन जब किनारे पर पानी शांत और एकाग्र होता है तो सब कुछ स्पष्ट दिखाई देता है। और, एकाग्रता की शक्ति आने से व्यर्थ विचार समाप्त हो जाते हैं। निर्णय शक्ति से misunderstanding भी नहीं होती, क्योंकि आपस के भाव को भी कैच कर सकते हैं। नब्ज परखने की शक्ति भी ज़रूरी है। परखने की शक्ति जितनी अधिक होगी, कमाई भी उतनी अधिक होगी। और इसका आधार है आंतरिक निर्णय शक्ति। दिव्य दृष्टि (Trans) में जाने की इच्छा बहुतों को होती है, लेकिन इसका कोई पुरुषार्थ नहीं है। ड्रामा अनुसार अगर वह पाठ है, तो Trans का अनुभव बाबा वरदान के रूप में कराएँगे। योग और Trans अलग हैं – Trans बाबा का वरदान है और योग अपना पुरुषार्थ है, अपनी कमाई है। योग में भी कंट्रोलिंग पावर चाहिए। अगर योग यथार्थ है तो टचिंग होगी, कोई गलती नहीं होगी, कभी समय मिस नहीं होगा – घड़ी देखने की भी आवश्यकता नहीं होगी।