

दादी जी के साथ प्रश्न-उत्तर। इस क्लास में जानिए, नीचे दिए गए सवालों का उत्तर दादी जानकी जी के मुख कमल से। 1. योग का प्रयोग कैसे करें? यथार्थ योग किसे कहते हैं? 2. संकल्प योग में क्यों आते हैं - इसका कारण क्या? 3. संस्कारों का परिवर्तन जल्दी कैसे हो जाए? 4. बाप समान बनने की युक्ति क्या है? 5. मन्सा सेवा बढ़ाने के लिए और क्या करें? कर्म करते मुझे बाबा याद रहे, मुझे कर्म की लगन हो। कर्म में फँसना नहीं है। कर्म करे, संबंध में आए, पर अनासक्त रहे। हमसे कुछ ऐसे छोटे-छोटे कर्म होते हैं कि वे योगी बनने नहीं देते। इसलिए बाबा ने कर्म फिलॉसफी का ज्ञान दिया है। जो अच्छे खानदान के होते हैं, उनको छोटेपन में ही सिखाते हैं कि, अगर कोई दो बात कर रहे हों, तो बीच में बात नहीं करना। वैसे ही जब हिसाब-किताब दो का हो, हम बीच में न आएं। अगर मैं समय सफल किया, तो मेरी भलाई है। जो समय की कद्र नहीं करता है, उसका भगवान भी कद्र नहीं करता है। बस एक ही संकल्प करना है - बाबा का बना हूँ; तो बाबा जैसा बनना है। भगवान कितना स्नेह दृष्टि से सहज करके बताते हैं, हमको पावन बनाने के लिए। इतनी सारी रचना को कैसे पैदा किया है? बाबा ने संकल्प से पैदा किया है। चिंता करते-करते भगवान के चिंतन में रहना भूल जाते हैं। ज्ञान कहता है - चिंता किसकी नहीं करनी चाहिए। समझदार वह जो न चिंता करे, न खुद की चिंता किसी को दे। जो मेरी स्थिति को गिराने वाली बातें हैं, उस तरफ देखना भी नहीं चाहिए । जो ऊँचा बनाने वाली बातें हैं, वहीं मेरा ध्यान जाए। सवेरे-सवेरे तीन गोली खाओ - धीरज, शांति और प्रेम। कर्म योगी का सबके साथ संबंध अच्छा रहेगा। हर समय काम में ध्यान; हर समय योग में ध्यान। खाना तो खाना ही है, क्यों न उस समय योगयुक्त होकर खाना खाए, पानी भी पिया, योग भी हुआ। बाप सुना रहे हैं, पूरे ध्यान से मैं आत्मा सुनूं - यही तो योग है। यथार्थ योग क्या है? हम ईश्वर के बच्चे हैं, तो हमारा योग ईश्वर से लगा रहे। हम नेचुरल आत्मा-अभिमानी बनकर रहें। अच्छा लगता है योग; ब्राह्मण लाइफ अच्छी लगती है। ब्राह्मण सेवा न करे, तो वह गृहस्थी है।