

दादी जी कक्षा में प्रश्नों के उत्तर स्पष्ट कर रही हैं। योग को कठिन न बनाओ; योग बड़ा सहज है। अगर दिल खुश नहीं है और दिमाग शांत नहीं है, तो बुद्धि बाबा में नहीं लग सकती। कामकाज और व्यवहार का संबंध दिल–दिमाग से है। अब ज्ञान का बराबर उपयोग करना है; पहले हमें पता नहीं था कि क्या सोचना है। संकल्प–विकल्प इसलिए आते हैं क्योंकि अभी कलयुग से निकले नहीं हैं। योग की मुख्य तीन बातें है —मैं कौन हूँ, किसकी हूँ और मुझे क्या करना है। बाबा ने कहा—बच्चा, तेरा स्वधर्म शांति है। प्रश्न: योग के लिए दीप कैसे जलाएँ? उत्तर: जो अंदर कचरा भरा हुआ है, पहले उसे साफ करे। जितनी अंदर की सफाई होगी, उतना ज्ञान टिकेगा और भावना आएगी। ज्ञान कहता है—कुछ भी हो, तुम न्यारी और प्यारी रहो। दादी जी तीन बातें बताती हैं— पुरुषार्थ के लिए, बाबा के लिए और अपने लिए अच्छी भावना रखो; निश्चय रखो कि विजय निश्चित है। थोड़ा पुरुषार्थ, ज्यादा सफलता—यही पुरुषार्थ की फर्स्ट नंबर की क्वालिटी है। सुस्ती, अलबेलापन और आलस्य—ये सच्चे पुरुषार्थी की निशानी नहीं है। छोटी–मोटी बातों का बहाना नहीं बनाओ। जो पढ़ाई और पुरुषार्थ में बहाना नहीं करते, समय भी उनकी मदद करता है। नंबर वन पुरुषार्थी की निशानी है—अंदर की सच्चाई और सफाई। जो ओटे सो अर्जुन—जो हम करेंगे, हमें देख सब करेंगे। बाबा ने सेवा सहज बना दी है—सकाश देते रहो, सबको मीठेपन और शीतलता का अनुभव होगा। बाबा कहते हैं—महारथी बनो। हाथी की तरह शांत, ईमानदार और लॉयल बनो, जिसे सदा मालिक याद रहता है। प्रभु के संग रहना ही सहज योग है। पंछी जैसे हल्के बनो, कौवे की तरह कांव–कांव नहीं। सत्यता हमारे स्वरूप में हो। प्रश्न: बुद्धि को स्थिर कैसे रखें? उत्तर: अपने ऊपर दया दृष्टि रख, अंतर्मुखी हो एकांत में बैठकर, एकाग्र होने का पुरुषार्थ करो। एकाग्रता की शक्ति से परमात्मा से संबंध जोड़ दिया माना “स्विच ऑन कर दिया”—बाकी बाबा करा लेंगे। याद में रहना बहुत जरूरी है; उसके बिना विकर्माजीत नहीं बन सकते। बाबा कहते हैं—दिल में ज्ञान सागर को बिठा दो, तुम स्वयं ज्ञानगंगा बन जाओ। याद में रहना मतलब अपने ऊपर दया और दुआ करना। ज्ञान और योगबल से ही दुनिया बदलेगी। सूर्यवंशी में वही आएंगे जो श्रीमत का पालन करेंगे और जानेंगे कि श्रीमत देने वाला स्वयं भगवान है। बाबा सदा तीन बातें देते हैं—शिक्षा, समझानी और सावधानी। कितनी भी माया आए, हम कच्चे नहीं, पक्के बनेंगे। ज्ञान कहता है चुप रहना सीखो, सहनशीलता के साथ नम्रता रखो। शांत रहने से हर परीक्षा पास होती है। जिसे बाबा याद रहता है, उसके सामने विघ्न टिक नहीं सकता। हमारा दिल साफ, दिमाग ठंडा और स्वभाव सरल हो।