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22 Shant Sthiti Aur Satopradhan Sanskar Ki Pahechan
Spiritual Classes

22 Shant Sthiti Aur Satopradhan Sanskar Ki Pahechan

Dadi Janki Ji
44:06137
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Spiritual Classes
22 Shant Sthiti Aur Satopradhan Sanskar Ki Pahechan
Dadi Janki Ji
44:06137 plays

Essence

ओम शांति — यह दिमाग को ठंडा बनाता है। जो प्रश्नचित है, उसके मन में प्रश्न पर प्रश्न उठते रहते हैं, इसलिए उत्तर सुनाई नहीं देता। संशय ऐसा है कि एक बार आया तो जाता नहीं, और वह कहीं से भी शुरू होकर बाबा तक पहुँच ही जाता है।

कोई बड़ी बात आए तो उसे शुभ भावना से राई (छोटा) बना दो। क्यों-कैसे में गए तो बात बड़ी बन जाएगी और नुकसान सबसे पहले स्वयं को होगा। अपने पर अटेंशन रखना है, दोष नहीं निकालना, अलबेलापन नहीं होना चाहिए।

प्रसन्नचित आत्मा किसी का दोष नहीं देखती। दूसरों का दोष देखने से ग्लानि और अपना देखने से दुख—दोनों ही नुकसानदायक हैं। एक बार दोष देखने की आदत पड़ गई तो ड्रामा की नॉलेज यूज नहीं हो सकेगी और अपनापन भी नहीं रहेगा।

अभी एक-दो को सावधान कर, उन्नति करने का समय है। स्वयं स्मृति में रहेंगे तो वायुमंडल औरों की उन्नति में मदद करेगा। यह समय महीन पुरुषार्थ, सहज सफलता और प्रत्यक्ष फल का है। रिद्धि - सिद्धि अपना चमत्कार दिखाती हैं, तो हमारी इतनी ऊंच विधि की सिद्धि प्रत्यक्ष फल नहीं दिखा सकती?

साइलेंस का फायदा वही उठा सकता है जिसकी मन की स्थिरता से वृत्ति अचल-अडोल है। कुछ भी हो जाए, हिलाने पर भी न हिले।

पीस का अर्थ बैठना नहीं, बल्कि पीसफुल नेचर बनाना है। पीसफुल में लवफुल भी हैं ,नॉलेजफुल भी हैं, नॉलेज से पीसफुल बने हैं और उसी से कर्म सुधरते हैं। अब कर्मों को कूटना नहीं, ज्ञान से परिवर्तन करना है।

मर्यादा, नम्रता व सभ्यता सिखाती हैं संस्कार से फिर कल्चर भी ऐसा होता हैं, बाबा कहे पीस, प्योरिटी, हैप्पीनेस हैं तो स्वर्ग हैं। मर्यादा नीति प्रमाण चलाती हैं, और हर कर्म विधि पूर्वक करेंगे, दिल से करेंगे, ईमानदारी से करेंगे छोटी सी भी बात में बेईमानी नहीं करेंगे।

जहाँ समझ और शक्ति है वहाँ “ट्राई करेंगे” नहीं होता। ट्राई कहना अंदर की कमजोरी का संकेत है, अधीनता हैं, अपने संस्कारों के वश हैं। और यह कमजोरी है तो अंदर से खुशी, शक्ति नहीं होगी ।
हमारे संस्कारों में हम ईश्वरीय संतान हों। संस्कृति में, चलन और चेहरे में, बोल में बड़ी रियलिटी और रॉयल्टी हो, ईश्वरीय आकर्षण हो। चित्त में कोई प्रश्न न हों लेकिन सहनशीलता, हर बात की समझ,
पीसफुल नेचर, सच्चा प्यार, उदारचित, सबका भला हो ये भावना हो—इसी आधार पर राजधानी स्थापित होगी।

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