

आतम पंछी मैं उड़ चला हो आतम पंछी मैं उड़ चला तन से निकल के वतन को चला आतम पंछी मैं उड़ चला हो आतम पंछी मैं उड़ चला पर्वत सागर धरा डगर पर्वत सागर धरा डगर देह जगत के छोड़ नगर निले गगन से भी पार चला हो निले गगन से भी पार चला तन से निकल के वतनको चला आतम पंछी मैं उड़ चला हो आतम पंछी मैं उड़ चला तारे कितने प्यारे है तारे कितने प्यारे है सारे जगसे न्यारे है प्रभु महासितारा बड़ा उजला हो प्रभु महासितारा बड़ा उजला तन से निकल के वतन को चला आतम पंछी मैं उड़ चला हो आतम पंछी मैं उड़ चला एक शमा कितने परवाने एक शमा कितने परवाने रूहोकी भाषा रूह ही जाने कैसे जाये आंचल छोड़ भला हो कैसे जाये आंचल छोड़ भला तन से निकल के वतन को चला आतम पंछी मैं उड़ चला हो आतम पंछी मैं उड़ चला नयना कहे की निहारते रहे नयना कहे की निहारते रहे मन के आंगनवा उतारते रहे आहा मेरे मन का वो मित मिला हो आहा मेरे मन का वो मित मिला तन से निकल के वतनको चला आतम पंछी मैं उड़ चला हो आतम पंछी मैं उड़ चला मैं उड़ चला __________________________