आत्म दर्शन स्वयं का दर्शन
आत्म दर्शन स्वयं का दर्शन
आत्म ज्योति जगा लें
बुझी हुई जगाकर ज्योति
स्वराज्य फिर पा ले
आत्म दर्शन स्वयं का दर्शन
आत्मा राजा कर्मेंद्रियों का
प्रजा ये इंद्रियां सारी
राजा अगर स्वराज्य पे बैठा
सुख संपत्ति हो भारी
स्वराज्य की रक्षा कर तु
स्वराज्य की रक्षा कर तु
स्वयं का पहरा लगा ले
आत्म दर्शन स्वयं का दर्शन
तु रथी रथ तन यह तेरा
आगे मन रूपी घोड़ा
पकड़ बुद्धि की लगाम हाथ में
संस्कारॉ वश दौड़ा
भुला राही अपने पथ को
भुला राही अपने पथ को
स्वदर्शन से पाले
आत्म दर्शन स्वयं का दर्शन
आत्म दर्शन स्वयं का दर्शन
आत्म ज्योति जगा लें
बुझी हुई जगाकर ज्योति
स्वराज्य फिर पा ले
आत्म दर्शन स्वयं का दर्शन
आत्म दर्शन स्वयं का दर्शन
आत्म दर्शन आत्म दर्शन आत्म दर्शन
आत्म दर्शन आत्म दर्शन आत्म दर्शन
