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"आबू की वादिया ये पर्वत की शृंखलाएं आबू की वादिया ये पर्वत की शृंखलाएं बहते पवन है कहते ये वृक्ष और लताएं सेवाए याद आए कहे चारो धाम हमको शत शत प्रणाम तुमको दादी प्रणाम तुमको शत शत प्रणाम तुमको दादी प्रणाम तुमको दिन हो पिताश्री का मातेश्वरी का चाहे भूली कभी ना दादी आबू वालो को बूलाए सम्मान प्यार पाए वो कैसे हम भुलाए बहते पवन है कहते ये वृक्ष और लताएं सेवाए याद आए कहे चारो धाम हमको शत शत प्रणाम तुमको दादी प्रणाम तुमको कर दिया जगत में आबू का नाम बाला दादी प्रकाशमणि के प्रकाश का उजाला कर दिया जगत में आबू का नाम बाला दादी प्रकाशमणि के प्रकाश का उजाला हम धन्यवाद करते धन्य धन्य खुदको पाए बहते पवन है कहते वृक्ष ये लताएं सेवाए याद आए कहे चारो धाम हमको शत शत प्रणाम तुमको दादी प्रणाम तुमको पचासी वर्षो तक की वह त्याग और तपस्या सुखदाई सेवा करके हर ली है हर समस्या मुस्कान तेरी पाकर मुखड़े ये मुस्कुराए बहते पवन कहते ये वृक्ष ये लताएं सेवाए याद आए कहे चारो धाम हमको शत शत प्रणाम तुमको दादी प्रणाम तुमको अध्यात्म के शिखर पर चढ़ी शिव से शक्ति पाकर अबला सबल हुई है पास तेरे आकर शक्ति बनी है नारी पाकर के प्रेरणाएं बहते पवन है कहते वृक्ष ये लताएं सेवाए याद आए कहते है चारो धाम हमको शत शत प्रणाम तुमको जितनी महान थी तुम उतना विनम्र देखा चिंता मिटाने वाली निश्चित तुमको देखा रेखाएं भाग्य वाली तुम्हे देख बढ़ती जाए बहते पवन है कहते ये वृक्ष और लताएं सेवाए याद आए कहे चारो धाम हमको शत शत प्रणाम तुमको दिखलाए दैवी दुनिया दिल आपका था दर्पण हम सच्चे मन से करते हम सच्चे मन से करते श्रद्धा सुमन समर्पण है काश संग जो बीते दिन फिर लौट आए बहते पवन है कहते ये वृक्ष और लताएं सेवाए याद आए कहे चारो धाम हमको शत शत प्रणाम तुमको दादी प्रणाम तुमको आबू की वादिया ये पर्वत की शृंखलाएं बहते पवन है कहते ये वृक्ष और लताएं सेवाए याद आए कहे चारो धाम हमको शत शत प्रणाम तुमको दादी प्रणाम तुमको दादी प्रणाम तुमको _______________________"