

अकालतख्त पर हो विराज विश्व कल्याण का सर पे ताज अकालतख्त पर हो विराज विश्व कल्याण का सर पे ताज आत्म स्मृति का तिलक लगा है हर दिल में बजने लगे साज शिव पिता से मिला है ये उपहार ताज तख्त तिलक है अपना श्रृंगार शिव पिता से मिला है ये उपहार ताज तख्त तिलक है अपना श्रृंगार अकालतख्तनशीन अकालमूर्त कितनी अलौकिक फरिश्ता सूरत अकालतख्तनशीन अकालमूर्त कितनी अलौकिक फरिश्ता सूरत न्यारी निराली बड़ी ही प्यारी रूहानियत से भरी है सीरत संगमयुग के हम है फरिश्ते बाबा से ही सारे रिश्ते देह से न्यारे सब के प्यारे सदा उमंग उत्साह में उड़ते शिव संदेश सभीको सुनाए शिव पिता से सभी को मिलाए हो निर्माण करे कल्याण आओ स्वर्ग धरापर हम लाए परमात्मा को भी हमपे नाज उनके दिल पे अपना राज अकालतख्त पर हो विराज विश्व कल्याण का सर पे ताज आत्म स्मृति का तिलक लगा है हर दिल में बजने लगे साज हमको मिला श्रेष्ठ स्वमान इसकी रोशनी करे कमाल देहभानके बादल ना रुके अंधेरे के न हो निशान मुश्किल को जो करे आसान अपना साथी स्वयं भगवान उनके स्नेही गोदी में ही समा रहे हम सुबह शाम आओ मिलके झूमे आज नई दुनिया का करे आगाज अकालतख्त पर हो विराज विश्व कल्याण का सर पे ताज आत्म स्मृति का तिलक लगा है हर दिल में बजने लगे साज शिव पिता से मिला है ये उपहार ताज तख्त दिल कहे अपना श्रृंगार शिव पिता से मिला है ये उपहार ताज तख्त दिल कहे अपना श्रृंगार