बापदादा ने विशेष लक्ष्य दिया है कि हमारी स्थिति योगयुक्त हो। हमारा आहार, विहार और विचार सब योगी जीवन जैसे हों। बाबा कहते हैं— युक्ति से मुक्ति मिलती है ।
योगयुक्त बनना ही वह युक्ति है, जिससे विकारों, रोगों और दुखों से मुक्ति मिलती है। यही जीवनमुक्ति है। बाबा हमें स्व परिवर्तन और विश्व परिवर्तन की विधि सिखाते हैं।
बाबा ने योग को सरल शब्दों में समझाया है— योग अर्थात,
• लगन में मगन होना
• याद की यात्रा पर रहना
• सर्व संबंध बाप से जोड़ना
• कनेक्शन
यदि इन चार बातों पर ध्यान रहे, तो तपस्या सहज हो जाती है।
योग की मुख्य बाधाएँ,
• आलस्य साधना का बड़ा शत्रु है। आलसी व्यक्ति योग नहीं कर पाता। आलस्य मानो दुश्मन के लिए दरवाज़ा खोल देना है।
• अलबेलापन: “कर लेंगे, देखेंगे, सोचेंगे”—यह अलबेलापन है। इससे आज की कमाई चली जाती है।
आलस्य कैसे भगाएँ?
अपनी जिम्मेदारी याद रखें। एसा सोचें कि —बाबा ने मुझे चुना है। मैं बाबा की उम्मीदों का तारा हूँ। याद रखें—मैं अनेक बार का विजयी हूँ। उल्लास आने से आलस्य भाग जाता है, जैसे प्रकाश आते ही अंधकार मिट जाता है।
समय का महत्व : बाबा कहते हैं—जो समय को मूल्य नहीं देते, वे मूल्यवान नहीं बन सकते। समय व्यर्थ करना, अपने अलौकिक जीवन को लौकिक बनाना है।
श्रीमत की लकीर : बाबा कहते हैं—लकीर से बाहर निकलोगे तो फकीर बन जाओगे। यह लकीर है श्रीमत और मर्यादा की।
जीवन में धारण करें : एकनामी बनना, एक के याद में रहना एकरस स्थिति, एकाग्रता, इकॉनमी, एकता (शिवबाबा से और आपस में भी)
जब ये गुण जीवन में आते हैं, तब योग सहज और जीवन सफल बन जाता है।
