"अमृतवेला हो गई भोर
अमृतवेला हो गई भोर
चल रे मनवा वतन की ओर
चल रे मनवा वतन की ओर
अमृतवेला………
ब्रम्ह मुहुरत में योग लगाले
मन चाहे वरदानों को पाले
ब्रम्ह मुहुरत में योग लगाले
मन चाहे वरदानों को पाले
बाबा की किरणों को खुद में समाले
दिव्य गुणों से खुद को सजा ले
शिव बाबा जैसा ना
शिव बाबा जैसा ना होगा कोई और
चल रे मनवा वतन की ओर
अमृतवेला………
ब्रम्हा बाबा तुझको बुलाए
बन के फरिश्ता उड़ उड़ जाए
ब्रम्हा बाबा तुझको बुलाए
बन के फरिश्ता उड़ उड़ जाए
नयनों में अपने उनको बसा के
अतिंद्रीय आनंद को पाले
ब्रम्हा जैसा योगी ना
ब्रम्हा जैसा योगी ना होगा कोई और
चल रे मनवा वतन की ओर
अमृतवेला………
शांतिधाम में मन को उड़ाले
देह बंधनों से मुक्ति पाले
शांतिधाम में मन को उड़ाले
देह बंधनों से मुक्ति पाले
प्रभु शक्तियां यहा मनचाही पाले
सुख शांति आनंद को पाले
शांतिधाम जैसा ना
शांतिधाम जैसा ना धाम कोई और
चल रे मनवा वतन की ओर
चल रे मनवा वतन की ओर
वतन की ओर
वतन की ओर
वतन की ओर
वतन की ओर
अमृतवेला
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