

अमृतवेले दिल में अपने प्रभु स्नेह भरे सबको भूल के बाबा को ही दिल से याद करे बाबा की है यही चाहना लगाव मुक्त बने व्यक्ति वैभव से न्यारे हो अनासक्त बने सर्वगुणों और विशेषता के बाबा है दाता स्नेह शक्ति हमपे सदा ही बाबा बरसाता बाबा के सिवा अब हमको कोई नहीं भाता पवित्रता से प्रकृति को भी पावन हम करे अमृतवेले दिल में अपने प्रभु स्नेह भरे सबको भूल के एक बाबा को दिल से याद करे लगाव मुक्त हो जाए तो क्रोध भी न रहे दिल में हो निस्वार्थ भावना मन से शुद्ध रहे पवित्रता का आधार है इसमें दृढ़ रहे प्रकाशस्तंभ बनकर हम रोशनी बिखेरे अमृतवेले दिल में अपने प्रभु स्नेह भरे सबको भूल के बाबा को ही दिल से याद करे बाबा की है यही चाहना लगाव मुक्त बने व्यक्ति वैभव से न्यारे हो अनासक्त बने अमृतवेले दिल में अपने प्रभु स्नेह भरे सबको भूल के एक बाबा को दिल से याद करे