आ आ आ आ
आनंद के प्रदाता ये स्नेह शक्ति दाता
अव्यक्त बापदादा सादर पधारिए
मंजुल मधुर निमंत्रण
अंतःकरण से कण कण
प्रभु आपको बुलाता
सादर पधारिए
सादर पधारिए
बिछड़े है कल्प भर के
प्यासे मिलन के तबसे
बच्चे बुला रहे है
मिल जाओ आज हमसे
दृष्टी से सृष्टि रच दो
मुरली से रंग भरदो
वरदानों के है दाता
सादर पधारिए
सादर पधारिए
कोमल सी भावनाये
निर्मल रहके कहना
संगमयुग में बाबा
संग आपकेही रहना
धरती भी नगमे गाती
अंबर भी गुनगुनाता
संसार सारा गाता
सादर पधारिए
सादर पधारिए
तेरे प्यार के संजोए
नयनोंको है भिगोए
यादों के मोतियों को
सासो में है पिरोए
वो सद्गुणों के सागर
भरने हर एक गागर
हर एक बुलाता
सादर पधारिए
सदर पधारिए
आनंद के प्रदाता
ये स्नेह शक्ति दाता
अव्यक्त बापदादा
सादर पधारिए
सादर पधारिए
सादर पधारिए
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