आंधियारे सभी मिट रहें उजियारा आ गया
ज्ञान सूर्य फिर से शिव प्यारा आ गया
आंधियारे सभी मिट रहें उजियारा आ गया
ज्ञान सूर्य फिर से शिव प्यारा आ गया
आंधियारे सभी मिट रहें उजियारा आ गया
ज्ञान सूर्य फिर से शिव प्यारा आ गया
आंधियारे सभी मिट रहें
संसार फसा हुआ था विकारों के जाल में
हर मानव बंधा हुआ था दुख के जंजाल में
हर आत्मा का फिर से
हर आत्मा का फिर से वो सहारा आ गया
ज्ञान सूर्य फिर से शिव प्यारा आ गया
आंधियारे सभी मिट रहें
विकारों के सागर में इस जग की नाव थी
ईश्वर बचाओ आकर आती आवाज थी
हर नाव को बचाने
हर नाव को बचाने वो किनारा अा गया
ज्ञान सूर्य फिर से शिव प्यारा अा गया
आंधियारे सभी मिट रहें
अंधकार में थे भटके मिलती ना राह थी
परमात्मा को पाए सबकी ये चाह थी
हर ज्योति को जगाने वो दुबारा अा गया
ज्ञान सूर्य फिर से शिव प्यारा अा गया
आंधियारे सभी मिट रहें उजियारा आ गया
ज्ञान सूर्य फिर से शिव प्यारा अा गया
शिव प्यारा आ गया
शिव प्यारा आ गया
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