ओम.. शांति ..शांति
ओम ..शांति ..शांति
अंतर्मन में ज्योति जगा लो, होगा दूर अंधेरा
होगा दूर अंधेरा
शिव का कर लो ध्यान ,आ रहा पावन पुण्य सवेरा
पावन पुण्य सवेरा
तुम हो कौन ? कहाँ से आए ?अपने आप को जानो आ.. आ..
राजयोग के द्वारा अपना परमपिता पहचानो आ.. आ..
इसी राजपथ पर चलकर तुम पालो अपना बसेरा
होगा दूर अंधेरा
तुम हो आत्मा ,तन से न्यारे, परमपिता को प्यारे आ.. आ..
दिव्य गुणों को धारण करके योगी बनो दुलारे आ.. आ..
ज्योति बिंदु ही तोड़ेगा ये माया मोह का घेरा
होगा दूर अंधेरा
अंतर्मन में ज्योति जगा लो, होगा दूर अंधेरा
होगा दूर अंधेरा
ओम ..शांति ..
होगा दूर अंधेरा
ओम ..शांति..
होगा दूर अंधेरा
ओम ..शांति..
