अन्तिम घड़ियां अा पहुंची है
कुछ ही क्षण रहे बाकी है
अन्तिम घड़ियां अा पहुंची है
कुछ ही क्षण रहे बाकी है
समय बीतता जाता है अब
याद घरकी आती है अब
याद घरकी आती है
अन्तिम घड़ियां अा पहुंची है
कुछ ही क्षण रहे बाकी है
तन से होकर् के अब न्यारे
मूल वतन जाना है प्यारे
होंगे वहा अव्यक्त नजारे
होंगे वहा अव्यक्त नजारे
धड़कन दिल की बताती है अब
याद घर की आती है
अन्तिम घड़ियां अा पहुंची है
कुछ ही क्षण रहे बाकी है
बहुत दिनों से खेल है खेला
खत्म हो रहा जग का मेला
कहा शिव ने ना हो अलबेला
कहा शिव ने ना हो अलबेला
घड़ियां बितती जाती है अब
याद घर की आती है
अन्तिम घड़ियां अा पहुंची है
कुछ ही क्षण रहे बाकी है
अब ना कीसिसे दिल को लगाना
नष्टोमोहा हो अब घर जाना
विस्तार को सार में लाना
विस्तार को सार में लाना
ज्ञान कि गूंज सुनाती है
अब याद घर की आती है
अन्तिम घड़ियां अा पहुंची है
कुछ ही क्षण रहे बाकी है
समय बीतता जाता है अब
याद घर की आती है अब
याद घर की आती है
अन्तिम घड़ियां अा पहुंची है
कुछ ही क्षण रहे बाकी है
—----------------------------
