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अपनी चिंतन की धारा बदल दो रोग चिंता का मिट जाएगा कर तपस्या करो याद शिव को दिल को आराम मिल जाएगा अपनी चिंतन की धारा बदल दो रोग चिंता का मिट जाएगा अपनी चिंतन की धारा बदल दो जिंदगी की इमारत बनी है ख्याल जैसा भी तुमने किया है जिंदगी की इमारत बनी है ख्याल जैसा भी तुमने किया है बीज बोया है जैसा भी मन में फल उसिका तो तुमने लिया है फल उसिका तो तुमने लिया है स्नेह सूचिता के संकल्प लाओ तर सुखो का वो फूल जाएगा अपनी चिंतन की धारा बदल दो रोग चिंता का मिट जाएगा अपनी चिंतन की धारा बदल दो जैसा सोचोगे वैसा बनोगे बोल और कर्म बदलेंगे सारे जैसा सोचोगे वैसा बनोगे बोल और कर्म बदलेंगे सारे कर्म में योग कर दो शामिल योग ही जिंदगी को सवारे योग ही जिंदगी को सवारे अपनी वानी से अमृत लुटाओ बोल वरदानी बन जाएगा अपनी चिंतन की धारा बदल दो रोग चिंता का मिट जाएगा अपनी चिंतन की धारा बदल दो जिंदगी की भटकती ये नैया पार होगी तपस्या के बल से जिंदगी की भटकती ये नैया पार होगी तपस्या के बल से सब मुश्किले पार कर दो अपनी रूहानी ताकद के बल से अपनी रूहानी तकाद के बल से शिव पिता ही है अपना सहारा उनकी यादों में सुख पाएगा अपनी चिंतन की धारा बदल दो रोग चिंता का मिट जाएगा कर तपस्या करो याद शिव को दिल को आराम मिल जाएगा अपनी चिंतन की धारा बदल दो रोग चिंता का मिट जाएगा अपनी चिंतन की धारा बदल दो —-----------------------------------------