

है अनादि ज्योतिबिंदु आदि में है देवता रूप मध्य में भी हम बनते पूज्य स्वरूप अब संगमयुगी ब्राह्मण सो बनेंगे फरिश्ते हम इन्हीं पांचों स्वरूपों में कर ले हम रमन मनकों हल्का करनेकी कसरत है यही मनकों हल्का करनेकी कसरत है यही अब फरिश्ता बनने को भी जरूरत है यही मन से दुरुस्त होंगे तन से भी स्वस्थ होंगे चलते फिरते ये अनुभव करें हर कदम इन्हीं पांचों स्वरूपों में कर ले हम रमन अनादि आत्मा आदि में देवता मध्य में पूज्य स्वरूप ब्राह्मण सो फरिश्ता मालिक है अपने मनके तो परवश नहीं होंगे मालिक है अपने मनके तो परवश नहीं होंगे संपन्न स्वरूप अपना धारण हम करेंगे बाबा ही अपना संसार शक्तियों का दिया उपहार सच्ची दिल पे है राजी सदा ही भगवान इन्हीं पांचों स्वरूपों में कर ले रमन जैसा भी समय हो वैसा स्वरूप बनाए जैसा भी समय हो वैसा स्वरूप बनाए अपनी कमियो को हम महसूस कर मिटाए हो सदा ही हम मिलनसार दे चले सबको सत्कार सबके स्नेही बनकर जिए ये जीवन अपनी पांचों स्वरूपों में करले हम रमन है अनादि ज्योतिबिंदु आदि में है देवता रूप मध्य में भी हम बनते पूज्य स्वरूप अब संगमयुगी ब्राह्मण सो बनेंगे फरिश्ते हम इन्हीं पांचों स्वरूपों में कर ले हम रमन अनादि आत्मा आदि में देवता मध्य में पूज्य स्वरूप ब्राह्मण सो फरिश्ता